Monday, February 16

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर 9 मार्च को चर्चा, सरकार की क्या तैयारी?

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को लेकर संसद के गलियारों में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने संकेत दिया है कि इस प्रस्ताव पर बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन यानी 9 मार्च को लोकसभा में चर्चा और उसके बाद वोटिंग कराई जा सकती है।

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रिजिजू ने स्पष्ट किया कि सरकार इस मुद्दे को जल्द से जल्द निपटाना चाहती है, ताकि इसके बाद संसद के शेष सत्र में सरकार अपने विधायी एजेंडे (Legislative Agenda) पर निर्बाध रूप से काम कर सके। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा है कि यह विवाद लंबा न खिंचे और स्पीकर सदन की कार्यवाही को सामान्य रूप से आगे बढ़ा सकें।

सरकार का दावा—NDA की स्थिति मजबूत

संसदीय कार्य मंत्री ने भरोसा जताया कि विपक्ष की कोशिश सफल नहीं होगी। रिजिजू ने कहा कि 542 सदस्यीय लोकसभा में NDA के पास 293 सांसदों का समर्थन है। इसके अलावा सरकार को उम्मीद है कि कुछ ऐसे दल और सांसद भी समर्थन कर सकते हैं, जो अभी तक इस मुद्दे पर खुलकर सामने नहीं आए हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष द्वारा स्पीकर पर कथित पक्षपात के आरोपों के आधार पर उन्हें हटाने का प्रयास संख्या बल के अभाव में विफल होता दिख रहा है

सरकार की रणनीति—पहले प्रस्ताव निपटाओ, फिर विधेयकों पर फोकस

सरकारी सूत्रों के अनुसार NDA नेतृत्व चाहता है कि यह मामला सत्र की शुरुआत में ही निपट जाए, ताकि पूरे बजट सत्र के दौरान कार्यवाही बाधित न हो। सरकार की रणनीति स्पष्ट है—पहले अविश्वास प्रस्ताव को सदन में लाकर निष्पक्ष बहस और मतदान से निपटाया जाए, फिर महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे बढ़ाया जाए।

बिरला को विदेश भेजने का फैसला भी संकेत

सरकार द्वारा 17 फरवरी को बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के रूप में BNP नेता तारिक रहमान के शपथ ग्रहण समारोह में ओम बिरला को प्रतिनिधि के तौर पर भेजने का निर्णय भी चर्चा में है। राजनीतिक हलकों में इसे स्पीकर के प्रति सरकार के मजबूत समर्थन और भरोसे के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

विपक्ष की तैयारी—कांग्रेस, TMC और AAP को जोड़ने की कोशिश

वोटिंग से पहले विपक्ष खासतौर पर कांग्रेस, TMC और AAP को एकजुट कर निर्णायक समर्थन जुटाने की कोशिश में लगा है। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस ने रणनीतिक तौर पर एक प्रस्ताव यह भी रखा कि बदले में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाने के मुद्दे पर विपक्षी दलों को समर्थन दिया जा सकता है।

TMC पहले से ही पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंस रिवीजन (SIR) को लेकर CEC के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है। ऐसे में विपक्ष इस मुद्दे को जोड़कर समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है।

9 मार्च को संसद में होगा बड़ा राजनीतिक मुकाबला

अब सबकी नजरें 9 मार्च पर टिकी हैं, जब लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बहस होगी और उसके बाद मतदान कराया जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष इसे सरकार के खिलाफ दबाव बनाने के मौके के रूप में देख रहा है, जबकि NDA इसे अपनी संख्यात्मक ताकत और एकजुटता प्रदर्शित करने के मंच में बदलने की तैयारी में है।

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