
नई दिल्ली: महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव की आराधना का सबसे बड़ा दिन है। इस खास मौके पर लोग अपने घर और मंदिरों को सजाते हैं। लेकिन अक्सर लोग महंगी सजावट के पीछे भागते हैं, जबकि कुछ आसान और पारंपरिक तरीकों से कम बजट में भी मंदिर को आकर्षक और पवित्र लुक दिया जा सकता है।
सादगी में छुपा है सौंदर्य
मंदिर की सजावट में भारी-भरकम चीजों का उपयोग करने से अक्सर मंदिर छोटा और भरा हुआ लगता है। वहीं बेलपत्र, धतूरा और गेंदे के फूल का सही इस्तेमाल न केवल सस्ता पड़ता है, बल्कि शिवजी को भी बेहद प्रिय है।
पीतल और तांबे की चमक
सजावट शुरू करने से पहले पीतल के दीयों, घंटों और कलश को अच्छी तरह साफ करें। शिवलिंग के पास तांबे के लोटे में ताजा गंगाजल और फूल रखने से मंदिर में शुद्धता और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
फूलों और बेलपत्र से करें सजावट
बेलपत्र शिवजी की पूजा में विशेष महत्व रखता है। मंदिर की दीवारों और शिवलिंग के चारों ओर बेलपत्र की माला बनाएं। गेंदे के फूलों का प्रयोग करें, जो सस्ते और लंबे समय तक ताजे रहते हैं। मंदिर के मुख्य द्वार पर फूलों का तोरण लगाना शुभ माना जाता है।
ड्रेपिंग और पर्दों का कमाल
यदि आप मंदिर को शाही लुक देना चाहते हैं, तो हल्के पीले, नारंगी या सफेद मलमल/नेट के कपड़े पीछे की दीवार पर दुपट्टे की तरह ड्रेप करें। इससे जगह बड़ी और शांत दिखती है, और मंदिर की तस्वीरें और मूर्तियां आकर्षक बनती हैं।
लाइटिंग का सही चुनाव
मंदिर में बहुत रंग-बिरंगी लाइटें लगाने की बजाय वॉर्म वाइट या पीली लाइट का प्रयोग करें। छोटी फेयरी लाइट्स या स्ट्रिप लाइट्स को कोनों में लगाकर आध्यात्मिक माहौल तैयार किया जा सकता है। मिट्टी या पीतल के दीयों से घर में दिव्य शांति बनी रहती है।
रंगोली से बढ़ाएं शोभा
प्रवेश द्वार या शिवलिंग के सामने छोटी रंगोली बनाएं। ‘ॐ’ या ‘डमरू’ के आकार वाली रंगोली बहुत शुभ मानी जाती है। अगर रंगों का उपयोग नहीं करना चाहें तो फूलों की पंखुड़ियों और चावल के आटे से फ्लोरल रंगोली तैयार की जा सकती है।
धूपबत्ती और अगरबत्तियों से बने सात्विक माहौल
मंदिर में धूपबत्ती, कपूर या चंदन की अगरबत्ती का उपयोग करें। शिवलिंग पर चंदन का लेप लगाएं और हल्की आवाज में शिव स्तुति या मंत्रों का जाप करें। इससे मंदिर में पवित्र और सकारात्मक माहौल बनता है।
टिप: सजावट में सादगी, प्राकृतिक रंग और सही योजना सबसे अधिक महत्व रखते हैं। महाशिवरात्रि पर यह छोटे उपाय न केवल बजट में फिट बैठते हैं, बल्कि मंदिर की शोभा भी बढ़ाते हैं।
