
जयपुर: जयपुर की मोती डूंगरी पहाड़ी पर स्थित एकलिंगेश्वर महादेव मंदिर की रहस्यमयी कहानियां इस महाशिवरात्रि भी कायम रहेंगी। साल में सिर्फ एक दिन खुलने वाला यह मंदिर, भक्तों की आंखों से अब भी दूर रहेगा। मंदिर में शिव-परिवार की मूर्तियां कभी टिक नहीं पाईं और रहस्यमयी ढंग से गायब हो जाती हैं।
भक्तों का कहना है, “पहाड़ पर शिव, नीचे गणेश और सामने लक्ष्मी नारायण”, लेकिन पिछले छह सालों से यह आध्यात्मिक त्रिकोण अधूरा है। यह मंदिर साल के बाकी 364 दिन बादलों और खामोशी में डूबा रहता है। कोरोना काल के दौरान यह मंदिर बंद किया गया था, और इस वर्ष भी सुरक्षा और प्रशासनिक कारणों से द्वार बंद रहेंगे।
अदृश्य मूर्तियों का रहस्य
मंदिर की सबसे रहस्यमयी बात इसकी ‘अदृश्य’ मूर्तियां हैं। जयपुर के बुजुर्ग बताते हैं कि राजाओं के समय यहां भगवान शिव, पार्वती, गणेश और कार्तिकेय की स्थापना हुई थी। लेकिन स्थापना के बाद मूर्तियां रहस्यमयी तरीके से गायब हो गईं। दूसरी बार प्राण-प्रतिष्ठा हुई, फिर भी मूर्तियां उसी तरह अदृश्य रह गईं।
शंकरगढ़ किले का ऐतिहासिक संबंध
सवाई जय सिंह द्वितीय ने इस पहाड़ी पर शंकरगढ़ किले की नींव रखी थी। कहा जाता है कि राजपरिवार जब भी युद्ध या बड़े कार्य के लिए निकलता था, तो पहाड़ी पर विराजमान महादेव से आशीर्वाद लिया जाता था। सावन में यहां हजारों लीटर जल से सहस्त्रघट रुद्राभिषेक किया जाता था। आज भी यह मार्ग भक्तों की प्रतीक्षा करता है।
इस महाशिवरात्रि पर जयपुरवासियों और श्रद्धालुओं के लिए यह मंदिर सिर्फ रहस्य और आस्था का प्रतीक बना रहेगा, जिसे देखने का अनुभव केवल इतिहास और कथाओं में ही मिल पाएगा।
