
मुंबई: अभिनेत्री और लेखिका प्रिया मलिक का लाइव शो ‘इश्क है’ दुनियाभर में चर्चित हो रहा है। उनकी किताब ‘इश्क के सात पड़ाव’ जल्द ही प्रकाशित होने वाली है। ‘मैंने इश्क लिखा’ सीरीज में प्रिया ने अपनी निजी जिंदगी और लेखन की प्रेरणादायक कहानी साझा की।
बचपन में पहली मोहब्बत और कविता
प्रिया मलिक को पहली बार प्यार का एहसास 12 साल की उम्र में हुआ। देहरादून के कार्मन स्कूल में पढ़ते समय उन्होंने अपने क्रश के लिए पहली प्रेम कविता लिखी। जब उन्होंने अपनी मम्मी-पापा को बताया, तो उन्हें डांट भी पड़ी। हालांकि यह पहला प्यार मुकम्मल नहीं हुआ, लेकिन कविता लिखने का शौक इसी से जाग गया।
“मैं बचपन से सपनों में जीने वाली लड़की थी। मुझे कहानी, कविता और फिल्मों वाला प्यार बहुत रोमांचित करता था,” प्रिया कहती हैं।
पहली शादी और परदेश की राह
21 साल की उम्र में प्रिया ने लव मैरिज की, लेकिन पति ऑस्ट्रेलिया में रहना चाहते थे। प्रिया भी उनके साथ चली गईं और वहीं एप्लाइड लिंग्विस्टिक्स में मास्टर्स की पढ़ाई की। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में 11-12 क्लास के बच्चों को इंग्लिश पढ़ाया।
लेकिन धीरे-धीरे उन्हें एहसास हुआ कि उनका दिल अपने देश भारत में ही है। इसके चलते उन्होंने अपनी पहली शादी को खत्म कर भारत लौटने का फैसला किया। इस अनुभव पर उन्होंने अपनी कविता ‘1999 ढूंढ रही हूं’ लिखी।
लेखन से बना करियर
2014 में ऑस्ट्रेलिया में पहली बार स्टेज पर अपनी कविता पढ़ने के बाद प्रिया ने भारत लौटकर 2017 में ओपन माइक पर अपनी कविताएं सुनाईं। लोगों ने उनकी कविताओं को खूब सराहा। इसी से उनका करियर बना और आज उनकी कविताएं उनकी पहचान हैं।
मुंबई में मिला सच्चा प्यार
प्रिया की जिंदगी में सच्चा प्यार करण के रूप में मुंबई में आया। पहली मुलाकात लिफ्ट में हुई और फिर दोस्ती का सिलसिला शुरू हुआ। एक रात प्रिया बीमार हुईं और करण ने उनकी पूरी देखभाल की। इस अनुभव ने उनके इश्क को मजबूत किया और दोनों ने शादी कर ली। आज उनका एक दो साल का बेटा है।
“मैंने उनके लिए कविता लिखी – ‘मेरा ऊपर वाला’, जिसमें लिखा है –
‘वो नीचे आया पड़ोसी बनकर, न कोई प्यार, न दोस्ती, लेकिन हमारे घर की छत और उसके घर की जमीन एक-दूसरे को कई सालों से जानती थी।’”
‘मुझे प्यार नहीं, इश्क चाहिए’
प्रिया के अनुसार, प्यार किसी से भी हो सकता है, लेकिन इश्क किसी एक से होता है। इश्क इंसान को बेहतर बनाता है। उन्होंने सीखा कि जब तक आप खुद से प्यार नहीं करते, तब तक किसी और को प्यार नहीं दे सकते। यही उनका जीवन मंत्र है।
उनकी किताब और लाइव शो इसी अनुभव, इश्क और आत्म-प्रेम की यात्रा का प्रतिबिंब हैं। प्रिया का मानना है कि महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए हमेशा संघर्ष करना पड़ता है, चाहे वह इश्क का अधिकार ही क्यों न हो।
“मुझे प्यार नहीं, इश्क चाहिए। मांग नहीं रही, हकदार हूं इसकी।”
