
नई दिल्ली: गार्डनिंग के शौकीन अक्सर पौधों की धीमी बढ़त और कम फूल आने की समस्या से परेशान रहते हैं। बाजार में मिलने वाले NPK खाद प्रभावी होते हैं, लेकिन लंबे समय तक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता पर असर पड़ सकता है। ऐसे में मसूर की दाल प्राकृतिक और जैविक विकल्प के रूप में बेहद कारगर साबित होती है।
माली और गार्डनिंग एक्सपर्ट ने पौधों में मसूर की दाल डालने का सही तरीका और दो आसान विधियां साझा की हैं। मसूर की दाल में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम और बोरोन जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जो पौधों की कोशिकाओं को मजबूत बनाते हैं और तेजी से ग्रोथ में मदद करते हैं।
तरीका 1: लिक्विड फर्टिलाइज़र
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आधा लीटर पानी में 2 बड़े चम्मच मसूर की दाल डालकर भिगो दें। सर्दियों में इसे पूरी रात और गर्मियों में 4 घंटे रखें।
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समय पूरा होने पर पानी छान लें। यह घोल पौधों के लिए एनर्जी ड्रिंक की तरह काम करता है।
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घोल को सीधे डालने से पहले 5 गुना पानी मिलाएं, ताकि पोषक तत्व संतुलित मात्रा में मिलें।
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भिगोने के बाद बची दाल को फेंकें नहीं। इसमें ताजा पानी डालकर 2 दिन बाद पुनः इस्तेमाल किया जा सकता है।
तरीका 2: पाउडर फर्टिलाइज़र
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सूखी मसूर दाल को मिक्सर में पीसकर बारीक पाउडर बनाएं।
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गमले की मिट्टी को अच्छी तरह गुड़ाई करें और एक चम्मच पाउडर चारों तरफ बिखेरें।
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मिट्टी में दबा दें और ऊपर से पानी डालें, ताकि पाउडर मिट्टी में सक्रिय हो जाए।
सावधानी और उपयोग
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लिक्विड या पाउडर दोनों प्रकार की खाद को महीने में केवल एक बार ही दें।
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लिक्विड खाद डालते समय उतना ही घोल डालें कि मिट्टी की ऊपरी परत अच्छी तरह भीग जाए।
मसूर की दाल की इस जैविक खाद के नियमित उपयोग से पौधों में नई पत्तियां तेजी से आती हैं और फूलों का आकार भी बड़ा और खूबसूरत बनता है।
माली का कहना है कि मसूर की दाल प्राकृतिक और सुरक्षित विकल्प है, जो पौधों को स्वास्थ्य और सुंदरता दोनों प्रदान करती है।
