Saturday, February 14

ससुराल वालों के दबाव में छोड़ी इन्फोसिस की नौकरी, बंजर जमीन पर खेती शुरू कर बनीं मिसाल, आज सालाना 40 लाख की कमाई

नई दिल्ली। कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों तो हालात चाहे जैसे भी हों, सफलता का रास्ता जरूर निकल आता है। कर्नाटक के धारवाड़ जिले की रहने वाली कविता मिश्रा ने भी यही साबित कर दिखाया है। कभी उन्हें ससुराल वालों के दबाव में इन्फोसिस में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी का ऑफर ठुकराना पड़ा था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। आज वही कविता मिश्रा खेती के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं और अपने इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल के जरिए सालाना करीब 40 लाख रुपये की कमाई कर रही हैं।

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इन्फोसिस का ऑफर मिला, लेकिन नौकरी नहीं करने दी गई

कविता मिश्रा एक मध्यमवर्गीय रूढ़िवादी कन्नड़ परिवार से आती हैं। उनकी शादी 1996 में हुई थी, जब वे अभी पढ़ाई कर रही थीं। इसके बाद उन्होंने कर्नाटक यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस में डिप्लोमा पूरा किया। पढ़ाई पूरी होने पर 1998 में उन्हें देश की प्रतिष्ठित आईटी कंपनी इन्फोसिस से सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर नौकरी का प्रस्ताव मिला।

लेकिन पारिवारिक परंपराओं और ससुराल पक्ष की सोच के कारण उन्हें घर से बाहर नौकरी करने की अनुमति नहीं मिली। मजबूरी में उन्हें यह सुनहरा अवसर छोड़ना पड़ा।

बंजर और पथरीली जमीन को बनाया खेत

हालांकि, नौकरी छोड़ने के बाद कविता ने खुद को कमजोर नहीं पड़ने दिया। उनके पति ने उन्हें गांव कविताल स्थित पुश्तैनी जमीन को विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया। यह जमीन पूरी तरह बंजर, पथरीली और पहाड़ी थी, जहां खेती करना लगभग असंभव माना जाता था।

कई वर्षों की मेहनत के बाद कविता ने वर्ष 2006 में इस जमीन पर अनार की खेती शुरू की। रायचूर जिले की शुष्क जलवायु के लिए अनार उपयुक्त था और शुरुआती वर्षों में फसल अच्छी भी हुई। इससे उन्हें हर फसल में लगभग 1 से 2 लाख रुपये तक की कमाई होने लगी।

बीमारी ने उजाड़ दिया पूरा बाग

लेकिन वर्ष 2011-12 में उनका अनार का पूरा बाग बैक्टीरियल ब्लाइट नामक गंभीर बीमारी की चपेट में आ गया। यह ऐसी बीमारी थी जिसका कोई इलाज नहीं था। विशेषज्ञों ने उन्हें सारे पेड़ उखाड़ने की सलाह दी।

लगभग आठ वर्षों की मेहनत के बाद जब पूरा बाग नष्ट हो गया, तो कविता के सामने एक बार फिर खाली खेत और नई चुनौती खड़ी हो गई।

इंटीग्रेटेड फार्मिंग से बदली किस्मत

इसके बाद एक सलाहकार के सुझाव पर कविता ने खेती का तरीका बदला और इंटीग्रेटेड फार्मिंग की शुरुआत की। यहीं से उनके सपनों ने नई उड़ान भरी और उन्होंने अपने वेंचर ‘कविता मिश्रा चंदन फार्म’ की नींव रखी, जो कर्नाटक के रायचूर जिले में स्थित है।

इस फार्म में मुख्य रूप से सफेद चंदन की खेती की जाती है। साथ ही उन्होंने इसे बहुउद्देशीय मॉडल बनाते हुए आम, अमरूद, शरीफा, आंवला, जामुन, इमली, नींबू, नारियल, केला, सहजन, हल्दी, करी पत्ता, चमेली, कॉफी और काली मिर्च जैसी कई फसलों को भी शामिल किया।

इसके अलावा फार्म में सागौन और लाल चंदन भी लगाए गए हैं, जिससे यह एक मजबूत एग्रोफोरेस्ट्री मॉडल बन गया है।

चोरी रोकने के लिए हाईटेक सुरक्षा व्यवस्था

कविता मिश्रा ने अपने फार्म की सुरक्षा को लेकर भी आधुनिक तकनीक अपनाई है। उन्होंने चंदन के पेड़ों में माइक्रोचिप आधारित ई-सिक्योरिटी सिस्टम लगाया है, जो किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नजदीकी पुलिस स्टेशन को तुरंत अलर्ट कर देता है।

अब सालाना 40 लाख की कमाई

कविता मिश्रा का कहना है कि उनके फार्म में प्रति एकड़ 5 से 6 करोड़ रुपये तक के संभावित रिटर्न की क्षमता है। उन्होंने चंदन और लाल चंदन की बिक्री के लिए कर्नाटक सोप्स एंड डिटर्जेंट्स लिमिटेड (KSDL) के साथ औपचारिक समझौता भी किया है।

आज कविता मिश्रा अपने फार्म से हर साल लगभग 40 लाख रुपये की कमाई कर रही हैं और हजारों महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।

महिलाओं के लिए प्रेरणादायक कहानी

इन्फोसिस की नौकरी छोड़ने से लेकर बंजर जमीन पर खेती कर करोड़ों की संभावनाओं वाला फार्म तैयार करने तक का कविता मिश्रा का सफर यह साबित करता है कि सपनों को दबाया जा सकता है, लेकिन मिटाया नहीं जा सकता। संघर्ष, धैर्य और मेहनत से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।

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