
डिब्रूगढ़ (शशि मिश्रा) – असम के डिब्रूगढ़ जिले में मोरान हाइवे इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ईएलएफ) पर भारतीय वायु सेना का पहला राफेल विमान उतरा। यह घटना पूर्वोत्तर के लिए ऐतिहासिक और दुर्लभ क्षण मानी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 14 फरवरी की यात्रा से पहले भारतीय वायु सेना ने टच-एंड-गो ऑपरेशन का पूर्ण पूर्वाभ्यास किया, जिसमें सुखोई-30, राफेल, स्वदेशी तेजस, हरक्यूलिस और एंटोनोव एएन-32 विमान शामिल रहे।
स्थानीय लोगों ने इस ऐतिहासिक क्षण को देखने के लिए हवाई पट्टी पर भारी भीड़ लगाई। विमान उतरते और गर्जना करते हुए वापस उड़ते ही दर्शक रोमांचित हो उठे। विशेष रूप से निर्मित 4.2 किलोमीटर लंबी राजमार्ग हवाई पट्टी पर लैंडिंग और टेक-ऑफ का प्रदर्शन भारतीय वायु सेना की शक्ति का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत कर रहा था।
प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा से पहले अभ्यास जारी
एनएच-127 पर स्थित ईएलएफ पर 13 फरवरी तक परीक्षण अभ्यास जारी रहेगा। यह अभ्यास प्रधानमंत्री की यात्रा की अंतिम तैयारियों का हिस्सा है, जिसमें वे औपचारिक रूप से इस सुविधा का उद्घाटन करेंगे और भारतीय वायु सेना द्वारा भव्य हवाई प्रदर्शन का अवलोकन करेंगे।
ऐतिहासिक महत्व और सुरक्षा व्यवस्था
असम के मुख्य सचिव रवि कोटा ने इस स्थल का दौरा किया और स्थानीय लोगों, विशेषकर छात्रों और बच्चों, को परीक्षण देखने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने इसे जीवन में एक बार मिलने वाला दुर्लभ अनुभव बताया।
मोरान हवाई पट्टी का रणनीतिक महत्व अत्यंत अहम है। आपातकालीन या युद्धकालीन परिस्थितियों में यह पारंपरिक हवाई अड्डों के अनुपलब्ध होने पर वैकल्पिक रनवे का काम करेगी। 14 फरवरी को प्रधानमंत्री का विमान इसी हवाई पट्टी पर उतरकर इतिहास रचेगा।
यातायात डायवर्जन लागू
परीक्षण और मुख्य कार्यक्रम को सुचारू रूप से आयोजित करने के लिए 6 फरवरी से 14 फरवरी तक एनएच-127 पर यातायात को मोरान कस्बे के रास्ते पुराने एनएच-37 से डायवर्ट किया गया है। डिब्रूगढ़ जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने भारतीय वायु सेना के साथ मिलकर सुरक्षा और संचालन की व्यवस्था सुनिश्चित की है।
