Tuesday, February 10

54 हजार करोड़ के साइबर फ्रॉड पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- यह लूट और डकैती से कम नहीं

नई दिल्ली। देश में लगातार बढ़ रहे साइबर अपराधों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। डिजिटल फ्रॉड के जरिए 54 हजार करोड़ रुपये की ठगी के एक मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने इसे पूरी तरह लूट और डकैती करार दिया। कोर्ट ने कहा कि साइबर ठगी के जरिए गबन की गई यह रकम कई छोटे राज्यों के वार्षिक बजट से भी अधिक है, जो बेहद गंभीर चिंता का विषय है।

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केंद्र सरकार को SOP बनाने के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश देते हुए कहा कि वह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), बैंकों और दूरसंचार विभाग (DoT) जैसे सभी संबंधित हितधारकों से विचार-विमर्श कर साइबर फ्रॉड से निपटने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करे।

अदालत ने स्पष्ट किया कि डिजिटल ठगी की घटनाओं पर नियंत्रण के लिए एक मजबूत और प्रभावी व्यवस्था बनाना अब समय की आवश्यकता बन चुकी है।

बैंकों की भूमिका पर उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस तरह के अपराध बैंक अधिकारियों की मिलीभगत या फिर उनकी लापरवाही के कारण भी संभव हो सकते हैं। कोर्ट ने RBI और बैंकों से समय पर कार्रवाई की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि यदि बैंक और नियामक संस्थाएं समय रहते सतर्क हो जाएं तो इस तरह की घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।

CBI को ‘डिजिटल अरेस्ट’ मामलों की पहचान के निर्देश

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ ने इस मामले को गंभीर मानते हुए सीबीआई को निर्देश दिया कि वह देशभर में बढ़ रहे ‘डिजिटल अरेस्ट’ से जुड़े मामलों की पहचान करे और प्रभावी जांच सुनिश्चित करे।

सरकार से जांच के लिए मंजूरी देने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि डिजिटल अरेस्ट मामलों की जांच के लिए सीबीआई को आवश्यक मंजूरी दी जाए, ताकि अपराधियों के खिलाफ तेज कार्रवाई हो सके।

ग्राहकों को अलर्ट करने वाला सिस्टम विकसित करें बैंक

कोर्ट ने बैंकों को निर्देश देते हुए कहा कि उन्हें ऐसा तंत्र विकसित करना चाहिए जिससे यदि कोई व्यक्ति डिजिटल अरेस्ट जैसी ठगी का शिकार हो रहा हो और उसके खाते से बड़ी रकम का लेन-देन हो रहा हो, तो ग्राहक को तुरंत अलर्ट किया जा सके और लेन-देन रोका जा सके।

मुख्य न्यायाधीश ने केंद्र सरकार को चेताते हुए कहा कि अदालत को उम्मीद है कि सरकार जल्द प्रभावी कदम उठाएगी, ताकि कोर्ट को सख्त निर्देश जारी करने के लिए मजबूर न होना पड़े।

निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी साफ दर्शाती है कि साइबर अपराध अब सिर्फ ऑनलाइन ठगी नहीं रह गए हैं, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था और आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन चुके हैं। अदालत ने केंद्र सरकार, RBI और बैंकों को स्पष्ट संकेत दिया है कि अब साइबर फ्रॉड पर रोक लगाने के लिए मजबूत व्यवस्था और ठोस कदम उठाना अनिवार्य है।

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