
नई दिल्ली। रूस में हाल ही में हुए चाकू हमले में चार भारतीय छात्रों के घायल होने के बाद विदेशों में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों की सुरक्षा और उनके साथ होने वाले शोषण व नस्लीय भेदभाव का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है। विदेश मंत्रालय (MEA) के ताजा आंकड़ों ने इस विषय को और गंभीर बना दिया है। आंकड़ों के अनुसार, दुनियाभर में भारतीय छात्रों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों में 50 प्रतिशत से अधिक शिकायतें अकेले रूस से सामने आई हैं।
196 देशों से आईं 350 शिकायतें, 200 से ज्यादा रूस से
विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में दुनिया के 196 देशों में पढ़ रहे भारतीय छात्रों ने शोषण, उत्पीड़न और नस्लीय भेदभाव से जुड़ी करीब 350 शिकायतें दर्ज कराईं। इनमें से 200 से अधिक शिकायतें रूस से आईं, जिससे रूस सबसे ज्यादा शिकायतों वाला देश बन गया।
आंकड़ों के अनुसार, शिकायतों के मामले में रूस के बाद फ्रांस, जॉर्जिया, किर्गिजस्तान, अमेरिका और जर्मनी का स्थान आता है।
तीन साल में तेजी से बढ़ीं शिकायतें
सबसे चिंताजनक बात यह है कि रूस में भारतीय छात्रों से जुड़ी शिकायतों में पिछले तीन वर्षों के दौरान तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
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2023 में शिकायतें: 68
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2024 में शिकायतें: 78
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2025 में शिकायतें: 201
यानी 2025 में मामलों की संख्या अचानक कई गुना बढ़ गई, जिससे भारतीय छात्रों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
रूस क्यों जाते हैं भारतीय छात्र?
रूस भारतीय छात्रों के लिए विशेष रूप से एमबीबीएस की पढ़ाई के कारण एक लोकप्रिय गंतव्य माना जाता है। यहां तुलनात्मक रूप से कम फीस और आसान प्रवेश प्रक्रिया के कारण राजस्थान, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों के बड़ी संख्या में छात्र मेडिकल शिक्षा के लिए रूस जाते हैं।
नस्लीय भेदभाव और मानसिक उत्पीड़न के आरोप
रूस में पढ़ रहे छात्रों ने बताया कि उन्हें कई बार दूसरे देशों के छात्रों द्वारा भेदभाव का सामना करना पड़ता है। कुछ मामलों में छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर भी मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। छात्रों का कहना है कि छोटी-छोटी बातों पर निष्कासन की धमकी दी जाती है, जिससे वे डर के कारण शिकायत दर्ज नहीं करा पाते।
निष्कासन के डर से नहीं करते शिकायत
मॉस्को स्थित एक मेडिकल विश्वविद्यालय से पढ़े छात्र कनिष्क ने बताया कि उनके छात्रावास में मामूली विवाद के बाद भारतीय छात्रों पर हमला किया गया और चाकू से धमकाया गया। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं अक्सर रिपोर्ट नहीं होतीं क्योंकि छात्र विश्वविद्यालय या प्रशासन के प्रतिशोध से डरते हैं।
संस्थागत समर्थन की कमी पर सवाल
ऑल एफएमजी के समन्वयक डी कौशल ने दावा किया कि रूस में भारतीय छात्रों को नस्लीय भेदभाव, मौखिक दुर्व्यवहार और संस्थागत समर्थन की भारी कमी का सामना करना पड़ता है। शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जाता और छात्र मजबूरी में चुप रह जाते हैं।
कई छात्र रूस छोड़ अन्य देशों की ओर बढ़ रहे
विशेषज्ञों के अनुसार, इन समस्याओं के चलते अब कई भारतीय छात्र रूस के बजाय कजाकिस्तान और किर्गिजस्तान जैसे देशों को प्राथमिकता दे रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के वर्षों में रूस जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में कम से कम 50 प्रतिशत तक गिरावट आई है।
निष्कर्ष
रूस भारतीय छात्रों के लिए शिक्षा का एक बड़ा केंद्र जरूर है, लेकिन शोषण और नस्लीय भेदभाव से जुड़ी बढ़ती शिकायतें यह संकेत दे रही हैं कि वहां सुरक्षा और संरक्षण को लेकर गंभीर सुधार की जरूरत है। विदेश मंत्रालय के आंकड़े इस बात की ओर इशारा करते हैं कि विदेशों में पढ़ रहे भारतीय छात्रों के लिए मजबूत निगरानी और प्रभावी सहायता प्रणाली विकसित करना अब बेहद जरूरी हो गया है।
