कई राज्यों ने ब्लैक फंगस को महामारी घोषित कर दिया गया है. (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)

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राजस्थान सरकार ने ब्लैक फंगस को महामारी घोषित कर दिया है. (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)

Black fungus’s havoc: कोटा के नेत्र विशेषज्ञों ने कोरोना के बाद तेजी से फैल रहे ब्लैक फंगस को लेकर बड़ी आशंका जाहिर की है. उनका अंदेशा है कि इसके पीछे बड़ी वजह कोरोना संक्रमित मरीजों को दी जा रही इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन (Industrial oxygen) हो सकती है.

कोटा. कोरोना महामारी के प्रकोप के साथ अब ब्लैक फंगस (Black fungus) के रोगियों की बढ़ती तादाद के बाद चिकित्सकों ने इसको लेकर बड़ी आशंका जताई है. कोटा के नेत्र विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि इसके पीछे कोरोना संक्रमित मरीजों को इलाज के दौरान दी गई इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन (Industrial oxygen) जिम्मेदार हो सकती है. हालांकि कोटा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने इस बारे में कुछ भी कहने को जल्दबाजी बताया है लेकिन उन्होंने इस पर शोध की जरुरत जताई है. ब्लैक फंगस के बढ़ते केस के बाद राजस्थान में इसे महामारी घोषित किया जा चुका है. ब्लैक फंगस का इलाज सुव्यवस्थित तरीके से हो इसको लेकर प्रदेश सरकार गंभीर है. कोरोना की दूसरी लहर में देशभर में बड़ी तादाद में ब्लैक फंगस के मामले सामने आने पर अब इस पर नेत्र विशेषज्ञ शोध की मांग कर रहे हैं. ब्लैक फंगस से फैली दहशत कोटा के नेत्र विशेषज्ञ डॉक्टर सुधीर गुप्ता का कहना है कि ब्लैक फंगस से इतनी दहशत हो गई है कि पॉजिटिव से नेगेटिव हो रहे लोग अपनी आंखों को चेक करवाने के लिए लगातार आ रहे हैं. हालांकि उनमें कोई लक्षण नहीं है लेकिन फिर वे भी डर की वजह से अपनी आंखों को चेक करवा रहे हैं.इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन के अनहाइजीन का पूरा अंदेशा है डॉ. गुप्ता ने अंदेशा जताया है कि देशभर में जिस तरह से ब्लैक फंगस के केस सामने आ रहे हैं उसके पीछे की वजह कोरोना रोगियों को ऑक्सीजन की आवश्यकता होने पर मेडिकल ऑक्सीजन की बजाय दी जा रही इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन हो सकती है। डॉ. गुप्ता के अनुसार इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन के अनहाइजीन का पूरा अंदेशा है. मेडिकल ऑक्सीजन की तुलना में इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन के स्टरलाइजेशन में वे सुरक्षित मापदंड नहीं अपनाये जा रहे हैं जो मेडिकल ऑक्सीजन में अपनाए जाते हैं. इस पर नेत्र विशेषज्ञ लगातार मंथन कर रहे हैं. मेडिकल कॉलेज प्राचार्य ने कहा शोध की जरुरत है
कोटा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर विजय सरदाना ब्लैक फंगस पर नेत्र विशेषज्ञों की ओर से जताये जा रहे अंदेशे पर फिलहाल कुछ भी कहना जल्दबाजी मानते हैं. उनका कहना है कि विशेषज्ञों द्वारा इस पर रिसर्च की जरूरत है. सरदाना ने कहा कि रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होना और पहले से किसी बीमारी से ग्रसित होने के साथ कोरोना की चपेट में आने से ब्लैक फंगस के मामले सामने आ रहे हैं. कोटा में इन रोगियों के लिये अलग से वार्ड बनाकर उनकर इलाज किया है. वहीं ऑपरेशन के लिए भी विशेषज्ञों की टीम तैनात कर दी गई है. कोटा में फिलहाल ब्लैक फंगस के 40 से 50 रोगी सामने आए हैं.







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