
ताइपे। अमेरिका ने ताइवान को जमीन पर आधारित हार्पून एंटी-शिप मिसाइल सिस्टम की पहली खेप सौंपनी शुरू कर दी है। इसे ताइवान की सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा कदम माना जा रहा है, क्योंकि हार्पून मिसाइलों को समुद्र में दुश्मन के युद्धपोतों को निशाना बनाकर उन्हें तबाह करने में बेहद सक्षम माना जाता है। यही वजह है कि इन्हें अक्सर ‘शिप किलर’ भी कहा जाता है।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हार्पून मिसाइल सिस्टम से जुड़े वाहनों का काफिला ताइवान पहुंच चुका है। इस काफिले में मिसाइल लॉन्चर ट्रक, रडार वाहन और कमांड एंड कंट्रोल यूनिट शामिल हैं। बताया गया है कि लॉन्चर वाहन HEMTT (Heavy Expanded Mobility Tactical Truck) प्लेटफॉर्म पर आधारित हैं, जो कठिन परिस्थितियों में भी तेजी से मूवमेंट करने में सक्षम है।
400 मिसाइलों और 100 सिस्टम का ऑर्डर
जानकारी के मुताबिक, ताइवान ने अमेरिका से कुल 100 हार्पून कोस्टल डिफेंस सिस्टम और 400 मिसाइलों का ऑर्डर दिया है। यह सौदा अमेरिका के Foreign Military Sales (FMS) चैनल के माध्यम से मंजूर किया गया था। इसका उद्देश्य ताइवान की समुद्री सीमा की सुरक्षा मजबूत करना और चीन के संभावित हमले या नाकेबंदी जैसी रणनीति का जवाब देने की क्षमता बढ़ाना है।
चरणबद्ध तरीके से होगी पूरी डिलीवरी
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह डिलीवरी तय कार्यक्रम के तहत चरणों में की जा रही है। मौजूदा टाइमलाइन के अनुसार 2026 के अंत तक 32 सिस्टम ताइवान को सौंपे जाएंगे, जबकि बाकी 68 सिस्टम 2028 तक ताइवान को मिलने की संभावना है।
ट्रेनिंग के लिए अमेरिकी इंस्ट्रक्टर तैनात
हार्पून मिसाइलों को ताइवानी सेना में शामिल करने के लिए अमेरिका ने इंस्ट्रक्टर और टेक्निकल सलाहकार भी तैनात किए हैं। पहले चरण में लॉन्चर, रडार और अन्य उपकरण दिए जा रहे हैं, जबकि मिसाइलों की डिलीवरी अंतिम चरण में होगी। इससे ताइवानी सेना को असली गोला-बारूद मिलने से पहले प्रशिक्षण और इंटीग्रेशन पूरा करने का समय मिल जाएगा।
कौन सा वेरिएंट खरीदा ताइवान ने?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ताइवान ने RGM-84L-4 Block II (U) वेरिएंट की हार्पून मिसाइलें खरीदी हैं। यह हार्पून मिसाइल परिवार का आधुनिक संस्करण है, जिसे तटीय इलाकों में बेहतर गाइडेंस और टारगेटिंग के लिए तैयार किया गया है। यह मिसाइल चलते हुए समुद्री लक्ष्यों को भी निशाना बना सकती है।
हार्पून की रेंज को लेकर अलग-अलग अनुमान सामने आए हैं। बोइंग के अनुसार इसकी रेंज करीब 124 किलोमीटर है, जबकि कुछ रिपोर्ट्स में इसकी क्षमता 148 किलोमीटर या उससे अधिक बताई जा रही है।
चीन के लिए क्यों बढ़ेगी चिंता?
विशेषज्ञों का मानना है कि हार्पून मिसाइलों की तैनाती से ताइवान की समुद्री सुरक्षा को बड़ी मजबूती मिलेगी। हाल के वर्षों में चीन के युद्धपोत लगातार ताइवान के आसपास गश्त बढ़ा रहे हैं और ताइवान जलडमरूमध्य में अपनी मौजूदगी दिखाकर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
चीन अक्सर ताइवान के प्रमुख बंदरगाहों—काओशुंग (Kaohsiung) और कीलुंग (Keelung)—के आसपास नो-गो जोन बनाकर नाकेबंदी जैसी रणनीति अपनाने की कोशिश करता रहा है। लेकिन अब हार्पून मिसाइल सिस्टम की मौजूदगी से चीन के लिए किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई या समुद्री घेराबंदी करना पहले के मुकाबले ज्यादा जोखिम भरा हो सकता है।
ताइवान की रक्षा रणनीति को मिलेगी मजबूती
हार्पून मिसाइलों को ताइवान की तटीय रक्षा कमान द्वारा ऑपरेट किए जाने की संभावना है। यह मिसाइल सिस्टम ताइवान को समुद्री हमले से बचाने के साथ-साथ चीन की नौसैनिक ताकत को चुनौती देने में अहम भूमिका निभा सकता है।
अमेरिका की यह डिलीवरी ताइवान को लेकर क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है, जो आने वाले समय में एशिया-प्रशांत क्षेत्र की रणनीतिक स्थिति को और संवेदनशील बना सकता है।