
हरगेइसा: सोमालीलैंड की रणनीतिक स्थिति अब दुनिया की नजरों में सबसे अहम बन गई है। लाल सागर में व्यापारिक जहाजों पर हूती विद्रोहियों के हमलों और इजरायल-हमास युद्ध के बीच, इस क्षेत्र में भारत, इजरायल, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और इथियोपिया एक नए सुरक्षा और व्यापारिक ढांचे का निर्माण कर रहे हैं।
सोमालीलैंड को मान्यता, वैश्विक प्रतिक्रिया
इजरायल ने 26 दिसंबर 2025 को सोमालीलैंड को मान्यता देकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सनसनी मचा दी। यह कदम लाल सागर और उसके व्यापारिक मार्गों में इजरायल का दबदबा बढ़ाने के लिए रणनीतिक महत्व रखता है। चीन, तुर्की, सऊदी अरब और इराक सहित कई देश इस फैसले की आलोचना कर रहे हैं। लेकिन धीरे-धीरे इजरायल, भारत, UAE और इथियोपिया इस क्षेत्र में एक नया धुरी गठबंधन बनाते दिख रहे हैं, जिसका उद्देश्य चीन और तुर्की के प्रभाव को संतुलित करना है।
लाल सागर में सुरक्षा और व्यापारिक मार्गों की रणनीति
चारों देश मिलकर अदन की खाड़ी और बाब अल-मंडाब समुद्री चोकपॉइंट्स को सुरक्षित करने पर फोकस कर रहे हैं। इजरायल की टेक्नोलॉजी, भारत की नौसैनिक क्षमता, UAE की पूंजी और इथियोपिया की भू-राजनीतिक स्थिति मिलकर इस रणनीति को मजबूती दे रही हैं।
भारत की भूमिका
भारत इस गठबंधन में नौसैनिक नेतृत्व निभा रहा है। SAGAR और MAHASAGAR पहलों के तहत भारत ने क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा, निगरानी और सहयोग को बढ़ावा दिया है। इससे भारत पूर्वी अफ्रीका और हॉर्न ऑफ अफ्रीका में अपने समुद्री प्रभाव को मजबूत कर रहा है और बाहरी शक्तियों जैसे अमेरिका और रूस की भूमिका को सीमित कर रहा है।
इथियोपिया का महत्व
इथियोपिया, सोमालीलैंड के बेरबेरा पोर्ट के माध्यम से, चीन के प्रभाव वाले जिबूती की वैकल्पिक मार्ग पेश करता है। भारत ने इथियोपिया के साथ रणनीतिक साझेदारी बनाई है, जिससे समुद्री सुरक्षा, हथियार परीक्षण और रक्षा निर्यात के अवसर बढ़ रहे हैं।
भविष्य की चुनौतियाँ
यह नया ढांचा एशिया-अफ्रीका-यूरोप कॉरिडोर की सुरक्षा और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पर केंद्रित है। इसकी सफलता और मजबूती इस बात पर निर्भर करेगी कि चीन और तुर्की जैसी प्रतिद्वंद्वी शक्तियां किस तरह प्रतिक्रिया देती हैं।