Friday, February 6

बीकानेर में खेजड़ी बचाओ आंदोलन में बड़ी जीत: सरकार झुकी, अनशन खत्म, लेकिन ‘ट्री एक्ट’ की मांग जारी

बीकानेर (पुलकित सक्सेना): राजस्थान के राज्य वृक्ष खेजड़ी को बचाने के लिए बीकानेर की तपती धरती पर पिछले पांच दिनों से जारी महापड़ाव में आंदोलनकारियों को बड़ी सफलता मिली है। राज्य सरकार ने बीकानेर और जोधपुर संभाग में खेजड़ी की कटाई पर तत्काल रोक लगा दी है। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने अपना अनशन समाप्त कर दिया।

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हालांकि, आंदोलनकारी अब पूरे प्रदेश में सख्त ‘ट्री एक्ट’ लागू कराने की मांग पर अड़े हैं। उनका कहना है कि पर्यावरण की रक्षा टुकड़ों में नहीं की जा सकती।

जोधपुर-बीकानेर में कटाई पर ‘फुल स्टॉप’
आंदोलन के चौथे दिन उद्योग राज्य मंत्री के.के. बिश्नोई महापड़ाव स्थल पहुंचे और बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने तुरंत प्रभाव से जोधपुर और बीकानेर संभाग में खेजड़ी के पेड़ों की कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। मंत्री ने यह भी भरोसा दिलाया कि मुख्यमंत्री इसी विधानसभा सत्र में ‘ट्री एक्ट’ लाने की तैयारी कर रहे हैं। इस आश्वासन के बाद संतों और आंदोलनकारियों ने जूस पीकर अनशन तोड़ दिया।

सिर्फ दो संभाग ही क्यों? आंदोलनकारियों का सवाल
अनशन भले ही समाप्त हुआ हो, लेकिन धरना स्थल से प्रदर्शनकारी हिले नहीं हैं। उनका तर्क है कि नागौर और पाली में भी हरे पेड़ों की कटाई जारी है। उन्होंने कहा, “क्या वहां का पर्यावरण अलग है? हमारी मांग केवल दो संभागों तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे राजस्थान में लागू होनी चाहिए।”

प्रदेशव्यापी कानून की मांग
आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर है। आंदोलनकारियों की मुख्य मांगें हैं:

  • पूरे राजस्थान में हरे पेड़ों की कटाई पर तत्काल रोक।

  • इसी विधानसभा सत्र में ट्री एक्ट पारित, जिसमें पेड़ काटने वालों के लिए सख्त जेल और भारी जुर्माना का प्रावधान।

  • जब तक कानून नहीं बनता, सरकार एक अंतरिम प्रशासनिक आदेश जारी करे ताकि नागौर और पाली जैसे जिलों में चल रही कटाई रोकी जा सके।

बीकानेर में खेजड़ी बचाने का यह आंदोलन न सिर्फ स्थानीय स्तर पर बल्कि पूरे राज्य के लिए पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।

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