

नई दिल्ली: सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) आईडीबीआई बैंक में अपनी 60.72% हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया में हैं। इस हिस्सेदारी को खरीदने के लिए कोटक महिंद्रा बैंक और प्रेमा वाट्स की फेयरफैक्स फाइनेंशियल ने रुचि दिखाई है और दोनों कंपनियों के बीच इस खरीद के लिए होड़ लगी हुई है। वित्तीय प्रस्ताव शुक्रवार को अलग-अलग जमा किए जाएंगे।

सूत्रों के अनुसार, वित्तीय बोलियां प्राप्त होने के बाद बैंक की न्यूनतम बिक्री कीमत यानी रिजर्व प्राइस तय की जाएगी। यह कीमत केवल कुछ सरकारी अधिकारियों को ही पता होगी और बोली लगाने वालों को नहीं बताई जाएगी। रिजर्व प्राइस का निर्धारण बैंक के व्यवसाय और संपत्तियों के मूल्यांकन के आधार पर किया गया है। आईडीबीआई बैंक की कुल संपत्तियों में जमीन और इमारत जैसी अचल संपत्ति का हिस्सा लगभग 3% है।
विनिवेश प्रक्रिया में सेबी (SEBI) भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड के ओपन ऑफर प्राइसिंग मैकेनिज्म को रिजर्व प्राइस तय करने के लिए मानदंड के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। आईडीबीआई बैंक का रणनीतिक विनिवेश अक्टूबर 2022 में शुरू हुआ था, लेकिन सरकार द्वारा संभावित खरीदारों के लिए उठाए गए कदमों के कारण इसमें कुछ देरी हुई।
सरकार ने वित्तीय वर्ष 2027 तक ₹80,000 करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखा है। DIPAM के सचिव अरुणिश चावला ने बताया कि आईडीबीआई बैंक का रणनीतिक विनिवेश अब तीसरे चरण में है, यानी तकनीकी और वित्तीय बोलियां मंगाई जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि इस वित्तीय वर्ष के अंत तक इस मामले में और जानकारी साझा की जाएगी।
जो भी कंपनी आईडीबीआई बैंक खरीदेगी, उसे आरबीआई से मंजूरी लेनी होगी। आरबीआई यह सुनिश्चित करेगा कि खरीदार बैंकिंग नियामक के ‘फिट एंड प्रॉपर’ मानकों पर खरा उतरता हो। इसके अलावा, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) और अन्य वैधानिक प्राधिकरणों की मंजूरी भी आवश्यक होगी। सफल बोली लगाने वाले को आईडीबीआई बैंक के अल्पसंख्यक शेयरधारकों के लिए ओपन ऑफर भी देना होगा।


