Wednesday, May 20

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RBI MPC बैठक: लोन सस्ता नहीं, रेपो रेट बना 5.25% पर स्थिर

नई दिल्ली: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने अपनी मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक के बाद रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को बैठक के बाद बताया कि रेपो रेट 5.25% पर स्थिर रहेगा। इसका मतलब है कि लोन की दरों पर फिलहाल कोई असर नहीं होगा और बैंकों से उधार लेना उतना ही महंगा या सस्ता रहेगा जितना पहले था।

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यह MPC बैठक केंद्रीय बजट 2026 के तुरंत बाद हुई और बाजार, कर्जदार तथा निवेशक सभी इस पर नजर रखे हुए थे कि रेपो रेट और अर्थव्यवस्था को लेकर क्या संकेत मिलते हैं। गवर्नर ने कहा कि पिछली नीतिगत बैठक के बाद से बाहरी चुनौतियां बढ़ी हैं, लेकिन हाल के व्यापारिक समझौतों का सफल समापन आर्थिक दृष्टिकोण के लिए सकारात्मक संकेत है। उन्होंने कहा कि निकट भविष्य में घरेलू मुद्रास्फीति और विकास का दृष्टिकोण स्थिर और सकारात्मक बना हुआ है।

RBI ने अपनी स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) दर 5% और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) दर तथा बैंक दर 5.5% पर स्थिर रखी है।

एक साल में कुल 125 बेसिस पॉइंट की कटौती
पिछले एक साल में RBI ने रेपो रेट में कुल 125 बेसिस पॉइंट की कटौती की है। दिसंबर 2025 में MPC ने 25 बेसिस पॉइंट्स की कटौती कर इसे 5.25% पर लाया था। विशेषज्ञों का मानना है कि अब RBI ‘देखें और इंतजार करें’ रणनीति अपनाएगी और अगली कटौती के लिए पहले पिछले कदमों के प्रभाव को देखेगी।

क्यों थी यह बैठक महत्वपूर्ण?
फरवरी की MPC बैठक ऐसे समय हुई जब केंद्रीय बजट पेश हुआ और भारत-अमेरिका के बीच बड़ा व्यापार समझौता हुआ। इन घटनाओं का असर महंगाई और आर्थिक विकास दोनों पर पड़ सकता है। बाजार जानकारों ने केवल रेपो रेट पर ही नहीं, बल्कि RBI की लिक्विडिटी प्रबंधन रणनीति और महंगाई तथा विकास के संतुलन पर भी नजर रखी।

रेपो रेट क्या है?
रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI बैंकों को पैसा उधार देता है। जब यह दर कम होती है, तो ग्राहकों और कंपनियों के लिए लोन सस्ता हो जाता है। MPC ने इसे स्थिर रखकर संकेत दिया कि मौजूदा महंगाई और विकास स्तर से संतुष्टि है।

बैंकों पर असर:
पिछली कटौतियों से पॉलिसी रेट कम हुआ है, लेकिन बैंकों की कर्ज दरों पर इसका असर धीरे-धीरे नजर आता है। वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, बैंकिंग प्रणाली में स्थिरता बनी हुई है और सरकारी बॉन्ड यील्ड स्थिर रहे हैं। RBI ने इसे ‘गोल्डीलॉक्स फेज’ कहा, यानी न ज्यादा गर्म और न ज्यादा ठंडा – आर्थिक स्थिति संतुलित है।

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