Wednesday, May 20

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बिहार विधानसभा में अपनों के बीच ‘पानी’ पर संग्राम: नल-जल योजना को लेकर मंत्री संजय कुमार सिंह घिरे

पटना। बिहार विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन सदन में उस समय तीखी नोकझोंक देखने को मिली जब नल-जल योजना को लेकर पीएचईडी मंत्री संजय कुमार सिंह** को अपनी ही सहयोगी पार्टी के विधायकों के सवालों का सामना करना पड़ा। हैरानी की बात यह रही कि मंत्री के दावों को विपक्ष नहीं, बल्कि **सत्तापक्ष के ही विधायक  गलत ठहराते नजर आए।

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प्रश्नोत्तर काल के दौरान लोजपा (रामविलास) के विधायक मुरारी गौतम ने मंत्री द्वारा दिए गए जवाबों को खारिज करते हुए कहा कि विभागीय अधिकारी मंत्री को गलत जानकारी देकर गुमराह कर रहे हैं। इसके बाद तेघड़ा से विधायक रजनीश कुमार ने भी मंत्री के जवाबों पर सवाल उठाकर सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया।

 

रोहतास में नल-जल योजना ‘अधूरी’, विधायक का आरोप

लोजपा-आर विधायक मुरारी गौतम ने सदन में आरोप लगाया कि रोहतास जिले में नल-जल योजना पूरी तरह बाधित है और लोगों को नियमित पानी नहीं मिल रहा। उन्होंने कहा कि विभागीय अधिकारियों द्वारा सरकार को भ्रामक और गलत रिपोर्ट दी जा रही है।

हालांकि मंत्री संजय कुमार सिंह ने सदन में दावा किया कि राज्य में पेयजल की कोई समस्या नहीं है। उन्होंने कहा कि जहां फ्लोराइड की शिकायतें आई थीं, वहां समाधान कर दिया गया है और जिन वार्डों में शिकायत थी, वहां भी पानी की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

लेकिन मंत्री के जवाब से संतुष्ट न होते हुए विधायक मुरारी गौतम ने सदन में तस्वीरें दिखाईं, जिसमें कई स्थानों पर नल-जल व्यवस्था के फेल होने के प्रमाण सामने आए। तस्वीरें देखकर सदन में कुछ देर के लिए माहौल गरमा गया।

 

विधानसभा अध्यक्ष ने संभाली स्थिति

मामला बढ़ता देख विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने विधायक से कहा कि उनकी बातें रिकॉर्ड में दर्ज हो चुकी हैं और मंत्री को इस विषय पर दोबारा समीक्षा करनी चाहिए।

अध्यक्ष ने सदन में कहा कि सरकार विधायक द्वारा उठाए गए बिंदुओं पर फिर से विचार करेगी और विभागीय स्तर पर मामले की समीक्षा कराई जाएगी।

 

तेघड़ा विधायक ने भी मंत्री को घेरा

सिर्फ रोहतास ही नहीं, बल्कि तेघड़ा विधानसभा क्षेत्र में भी नल-जल योजना की स्थिति को लेकर विधायक रजनीश कुमार ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि उनके क्षेत्र में कुल 280 नल-जल योजनाएं हैं, जिनमें से अधिकांशरखरखाव के अभाव और ऑपरेटरों को मानदेय नहीं मिलने के कारण बंद पड़ी हैं।

उन्होंने मंत्री से सीधा सवाल पूछा कि नल-जल ऑपरेटरों को मानदेय का भुगतान मासिकआधार पर होता है याएकमुश्त?

मंत्री का जवाब, फिर विधायक का पलटवार

मंत्री संजय कुमार सिंह ने जवाब देते हुए कहा कि क्षेत्र के 246 पंपों का संचालन पीएचईडी विभाग** कर रहा है, जबकि बाकी योजनाएं **पंचायती राज विभागके अधीन आती हैं।

लेकिन विधायक रजनीश कुमार ने मंत्री के आंकड़ों को गलत बताते हुए पलटवार किया। उन्होंने कहा कि पंचायती राज विभाग के पास केवल 34 योजनाएं हैं, जबकि मंत्री द्वारा दिया गया उत्तर अधूरा और भ्रामक है।

विधायक ने आरोप लगाया कि विभाग कई महत्वपूर्ण सवालों पर चुप्पी साध रहा है और जमीन पर स्थिति बेहद खराब है।

 

‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ पर उठे सवाल

तेघड़ा विधायक रजनीश कुमार ने कहा किजल जीवन मिशन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का ड्रीम प्रोजेक्ट है, लेकिन उनके क्षेत्र में आधे से ज्यादा इलाकों में लोग बूंद-बूंद पानी** के लिए तरस रहे हैं।

उन्होंने कहा कि बिजली बिल और ऑपरेटरों के पारिश्रमिक का भुगतान नहीं होने के कारण योजनाएं ठप पड़ी हैं और सरकार के दावे सच्चाई से कोसों दूर हैं।

 

सत्तापक्ष में ही असंतोष, सरकार की बढ़ी मुश्किल

सदन में जिस तरह से सत्तापक्ष के विधायकों ने ही मंत्री के जवाबों को कठघरे में खड़ा किया, उससे यह साफ संकेत मिला कि नल-जल योजना को लेकर सरकार के भीतर ही असंतोष** पनप रहा है।

अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या सरकार केवल कागजों पर योजनाओं को सफल बताकर काम चला रही है या वास्तव में जनता को पानी पहुंचाने की व्यवस्था धरातल पर मजबूत होगी।

 

निष्कर्ष

बिहार विधानसभा में नल-जल योजना पर उठा विवाद केवल एक तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि सरकार के दावों और जमीनी हकीकत के बीच बढ़ती दूरी का संकेत है। मंत्री संजय कुमार सिंह के जवाबों पर सत्तापक्ष के विधायकों की नाराजगी ने यह साफ कर दिया कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और बड़ा राजनीतिक रूप ले सकता है।

 

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