Friday, June 5

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नया यूपी अपराध को कतई बर्दाश्त नहीं करेगा: CM योगी बोले – फॉरेंसिक साइंस लैब्स मॉडर्न पुलिस के लिए गेम चेंजर

गोरखपुर, ऐश्वर्य कुमार राय

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि 2017 के बाद का नया उत्तर प्रदेश अपराध को कतई स्वीकार नहीं करता। अब पीड़ित भटकते नहीं हैं और अपराधी बच नहीं पाते। प्रदेश सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति, वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित जांच और आधुनिक फॉरेंसिक साइंस लैब्स के माध्यम से अपराधियों को पकड़ने की ऐसी व्यवस्था तैयार की गई है कि कोई अपराधी बच नहीं सकता।

गोरखपुर में अपग्रेडेड फॉरेंसिक साइंस लैब का उद्घाटन
मुख्यमंत्री ने मंगलवार को बी से ए क्लास में उच्चीकृत क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला (RFSL) गोरखपुर के नए भवन का लोकार्पण किया। छह मंजिला इस हाईटेक भवन के निर्माण पर 72.78 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। सीएम योगी ने कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए यह अत्याधुनिक लैब मॉडर्न पुलिस के लिए गेम चेंजर साबित होगी।

फॉरेंसिक लैब्स से अपराधियों की कोई बचत नहीं
2017 से पहले उत्तर प्रदेश में केवल चार फॉरेंसिक साइंस लैब थीं। अब कमिश्नरी स्तर पर कुल 12 लैब सक्रिय हैं और छह निर्माणाधीन हैं। प्रत्येक जिले में दो मोबाइल फॉरेंसिक वैन उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे कुछ ही घंटों में पुख्ता साक्ष्य संकलित किए जा सकते हैं और पीड़ित को सहज और समयबद्ध न्याय मिल सकेगा।

नए कानूनों से बढ़ी फॉरेंसिक जांच की उपयोगिता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में 2024 में लागू तीन नए कानूनों (भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और भारतीय साक्ष्य संहिता 2023) के तहत सात वर्ष से अधिक कारावास वाले अपराधों में फॉरेंसिक जांच अनिवार्य कर दी गई है। सीएम योगी ने बताया कि इससे पहले ही यूपी सरकार लैब्स स्थापित करने की तैयारी कर रही थी।

नौकरी और प्रशिक्षण के अवसर
फॉरेंसिक साइंस लैब्स से युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होंगे। लखनऊ में यूपी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस की स्थापना की गई है, जहां लैब तकनीशियन, साक्ष्य मिलान विशेषज्ञ और विशेषज्ञों के लिए सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और डिग्री कोर्स शुरू किए गए हैं।

उन्नत तकनीक से सटीक जांच
इस लैब में एडवांस डीएनए डायग्नोस्टिक, एआई, ड्रोन, रोबोटिक लैब सहित नैनो से 40 किलो वजनी ड्रोन संचालित करने की सुविधा उपलब्ध है। बैलेस्टिक, नार्कोटिक्स, साइबर फॉरेंसिक, डीएनए प्रोफाइलिंग और डाक्यूमेंट विश्लेषण जैसी सभी उन्नत जांचें यहां संभव होंगी।

पुलिसिंग में सुधार और सुरक्षा
सीएम योगी ने बताया कि पिछले आठ वर्षों में 2.19 लाख पुलिसकर्मियों की भर्ती की गई है और प्रशिक्षण क्षमता दस गुना बढ़ गई है। इसके साथ ही कमिश्नरेट सिस्टम लागू किया गया और 13 लाख से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाकर महानगरों को सुरक्षित बनाया गया।

महिला सुरक्षा और हेल्पलाइन
महिला पुलिस बल की हिस्सेदारी 13 फीसदी से बढ़ाकर 35 फीसदी से अधिक की गई। हेल्पलाइन 112 के माध्यम से पुलिस, एम्बुलेंस, फायर सर्विस और साइबर हेल्पलाइन को इंटीग्रेट किया गया है, जिससे नागरिकों को त्वरित और पारदर्शी न्याय सुनिश्चित हो सके।

उपस्थित लोगों में सांसद रविकिशन, विधायक फतेह बहादुर सिंह, प्रमुख सचिव गृह संजय प्रसाद, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी शामिल रहे।

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