
तेहरान/नई दिल्ली: ईरान में करेंसी गिरावट और महंगाई के विरोध में शुरू हुए प्रदर्शन देशभर में फैल गए हैं। अब यह हिंसा और हड़ताल चाबहार पोर्ट तक पहुंच चुकी है, जिससे भारत की रणनीतिक और आर्थिक चिंताएं बढ़ गई हैं।
चाबहार पोर्ट भारत के लिए सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से भी अहम है। यह पोर्ट पाकिस्तान को बायपास करके अफगानिस्तान, मध्य एशिया, रूस और यूरोप तक भारत की पहुंच सुनिश्चित करता है। भारत ने यहां 500 मिलियन डॉलर का निवेश किया है और यह पोर्ट इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) में अहम कड़ी है। INSTC पारंपरिक स्वेज नहर मार्ग की तुलना में ट्रांजिट समय 25-30 दिन कम करता है और लागत लगभग 30 प्रतिशत घटाता है।
इंटेलिजेंस सूत्रों के अनुसार, हड़ताल, इंटरनेट बंद और सड़कों पर विरोध प्रदर्शन के कारण ईरान में सप्लाई-चेन प्रभावित हो रही है। इससे चाबहार में कार्गो हैंडलिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में देरी हो सकती है। खासकर चाबहार-जाहेदान रेलवे प्रोजेक्ट, जो INSTC के लिए मुख्य है, प्रभावित होने का खतरा है।
भारत को यह भी चिंता है कि ईरान में अस्थिरता का फायदा चीन उठा सकता है। चाबहार पोर्ट पाकिस्तान में चीन के ग्वादर पोर्ट के बढ़ते दबदबे के खिलाफ रणनीतिक संतुलन बनाए रखता है। इसी कारण भारत लगातार ईरान की स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
विशेषज्ञों के अनुसार, चाबहार में लंबी अवधि तक अस्थिरता भारत के लिए न केवल आर्थिक नुकसान बल्कि क्षेत्रीय रणनीतिक नुकसान भी ला सकती है।