
मुंबई: अब विरार से वडोदरा तक का रेल सफर पहले से ज्यादा सुरक्षित हो गया है। पश्चिम रेलवे ने 344 किलोमीटर लंबे सेक्शन पर कवच (Kavach) ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम को सफलतापूर्वक चालू कर दिया है। यह वही मार्ग है, जहां से रोज़ाना सैकड़ों यात्री ट्रेनें और मालगाड़ियां गुजरती हैं।
इस परियोजना पर लगभग 397 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं और सबसे पहले सूर्यनगरी एक्सप्रेस दौड़ी। अधिकारी ने बताया कि आने वाले समय में मुंबई उपनगरीय और लंबी दूरी की ट्रेनों को भी इसका लाभ मिलेगा।
मुंबई सबर्बन सेक्शन पर जल्द लागू
वडोदरा–सूरत–विरार सेक्शन पर काम जनवरी 2023 में शुरू हुआ था और अब पूरा हो चुका है। इससे पहले वडोदरा–अहमदाबाद सेक्शन पर भी कवच लागू किया जा चुका है। पश्चिम रेलवे के कुल 435 किलोमीटर रूट पर कवच प्रणाली अब चालू हो चुकी है। मुंबई सबर्बन सेक्शन (विरार से मुंबई सेंट्रल) पर इसे सितंबर 2026 तक लागू करने का लक्ष्य है।
तकनीकी तैयारी:
सुरक्षा को मजबूत करने के लिए ट्रैक पर 8,000 से ज्यादा RFID टैग, 57 रेडियो टावर और पूरे रूट पर ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई गई हैं। कवच सिस्टम लोको पायलट को केबिन में ही सिग्नल की जानकारी देता है और यह सिग्नल तोड़ने, ओवरस्पीड और टकराव रोकने में मदद करता है। कोहरा, बारिश या खराब मौसम में भी इसका संचालन सुरक्षित रहता है।
फिलहाल कवच सिस्टम में:
- लोकोमोटिव: 364 इंजन लैस
- फायदे: टक्कर से सुरक्षा, ओवरस्पीड कंट्रोल, सिग्नल तोड़ने से रोकथाम, खराब मौसम में सुरक्षित ऑपरेशन
आगे की योजना:
- वडोदरा–नागदा सेक्शन: मार्च 2026 तक
- विरार–मुंबई सेंट्रल सेक्शन: सितंबर 2026 तक
विरार–वडोदरा सेक्शन का डेटा:
- लंबाई: 344 किमी
- कुल कवच रूट (WR): 435 किमी
- लागत: 397 करोड़ रुपये
- RFID टैग: 8,000+
- रेडियो टावर: 57
पश्चिम रेलवे का मानना है कि कवच सिस्टम लागू होने से ट्रेनों की सुरक्षा और समय पर संचालन सुनिश्चित होगा, और यात्री सफर पहले से काफी सुरक्षित बन जाएगा।