Saturday, January 31

बजट 2026: मिडिल क्लास पर पढ़ाई का बोझ कम होगा या राहत रहेगी सीमित?

 

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देश का मध्यम वर्ग एक बार फिर केंद्रीय बजट से बड़ी उम्मीदें लगाए बैठा है। बढ़ती स्कूल फीस, महंगे कॉलेज और कोचिंग संस्थानों के बीच सवाल यह है कि क्या बजट 2026 वास्तव में पढ़ाई के बढ़ते खर्च से मिडिल क्लास को राहत दिला पाएगा या फिर यह राहत सिर्फ आंकड़ों तक सीमित रह जाएगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को लोकसभा में बजट पेश करेंगी।

 

बीते कुछ वर्षों में शिक्षा की लागत में तेज़ी से इज़ाफा हुआ है। प्राइमरी स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक फीस, परीक्षा शुल्क, कोचिंग, हॉस्टल और रहने-खाने का खर्च मध्यम वर्ग के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है। स्थिति यह है कि न तो यह वर्ग सरकारी योजनाओं की पात्रता में आता है और न ही निजी संस्थानों की महंगी पढ़ाई आसानी से वहन कर पाता है।

 

अब सिर्फ प्राइवेट नहीं, सरकारी शिक्षा भी महंगी

 

शिक्षा महंगाई अब केवल निजी संस्थानों तक सीमित नहीं रही। सरकारी कॉलेजों में सेल्फ-फाइनेंस्ड सीटें, बढ़ती परीक्षा फीस और सीमित संसाधनों ने पढ़ाई को और महंगा बना दिया है। वहीं, निजी विश्वविद्यालय और कोचिंग संस्थान इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीक के नाम पर लगातार फीस बढ़ा रहे हैं।

 

पब्लिक सेक्टर निवेश से मिल सकती है राहत

 

लर्निंग स्पाइरल के संस्थापक और शिक्षा विशेषज्ञ मनीष मोहता के अनुसार, यदि सरकार सरकारी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में निवेश बढ़ाए तो इसका सीधा फायदा मिडिल क्लास को मिल सकता है।

सरकारी संस्थानों में सीटें बढ़ने से महंगे निजी विकल्पों पर निर्भरता घटेगी। साथ ही बेहतर लैब, हॉस्टल और डिजिटल सुविधाएं मिलने से छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कम लागत में मिल सकेगी। क्षेत्रीय कॉलेजों की संख्या बढ़ने से छात्रों का घर से दूर जाकर पढ़ने का खर्च भी बचेगा।

 

एजुकेशन लोन बना सबसे बड़ा तनाव

 

मध्यम वर्ग के लिए एजुकेशन लोन अब अवसर नहीं, बल्कि बोझ बनता जा रहा है। ऊंची ब्याज दरें, सीमित रीपेमेंट विकल्प और टैक्स छूट की कमी के कारण पढ़ाई पूरी होते ही परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ जाता है।

बजट 2026 में मिडिल-इनकम परिवारों के लिए ब्याज सब्सिडी, इनकम-आधारित रीपेमेंट मॉडल और लंबी भुगतान अवधि जैसे कदम राहत दे सकते हैं।

 

ट्यूशन फीस पर टैक्स राहत की जरूरत

 

फिलहाल ट्यूशन फीस पर मिलने वाली टैक्स छूट वास्तविक खर्च को नहीं दर्शाती। यदि बजट में इसकी सीमा बढ़ाई जाती है और स्किल ट्रेनिंग, ऑनलाइन कोर्स व प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को भी इसमें शामिल किया जाता है, तो कामकाजी मध्यम वर्ग को सीधा लाभ मिल सकता है।

 

निजी संस्थानों की फीस पर पारदर्शिता जरूरी

 

फीस रेगुलेशन को लेकर संतुलन बनाना जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि सख्त नियंत्रण से निवेश प्रभावित हो सकता है, लेकिन फीस बढ़ोतरी के लिए पारदर्शी ढांचा, सभी शुल्क का सार्वजनिक खुलासा और गुणवत्ता से जुड़ी शर्तें मनमानी बढ़ोतरी पर लगाम लगा सकती हैं।

 

मिडिल क्लास के लिए अलग स्कॉलरशिप मॉडल

 

अधिकतर स्कॉलरशिप योजनाएं या तो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग या टॉप परफॉर्मर्स तक सीमित हैं। मिडिल क्लास के लिए मेरिट और आय आधारित स्कॉलरशिप, खासकर प्रोफेशनल और तकनीकी कोर्स में, बड़ी राहत साबित हो सकती हैं।

 

कार्रवाई की उम्मीद

 

विशेषज्ञों का कहना है कि बजट 2026 तभी असरदार होगा जब केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर इन नीतियों को ज़मीनी स्तर पर लागू करें। सिर्फ घोषणाओं से नहीं, बल्कि ठोस निवेश, लोन सुधार, टैक्स राहत और लक्षित स्कॉलरशिप से ही मध्यम वर्ग के छात्रों और अभिभावकों को वास्तविक राहत मिल सकेगी।

 

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