
सपनों की कोई सीमा नहीं होती—बस उन्हें पूरा करने का जज़्बा चाहिए। मध्य प्रदेश के छोटे से गांव सिंगापुरा के रहने वाले विष्णु गुर्जर ने यह बात अपने संघर्ष और सफलता से साबित कर दी। जिस गांव में कभी PCS या PSC का नाम तक लोगों ने नहीं सुना था, वहां एक किसान के बेटे ने खेतों में काम करते हुए और भैंस चराते हुए अधिकारी बनने का सपना देखा—और उसे साकार भी किया।
विष्णु गुर्जर का बचपन बेहद साधारण और संघर्षों से भरा रहा। उनके माता-पिता कभी स्कूल नहीं गए। पिता खेती-किसानी करते थे और परिवार की आर्थिक स्थिति सीमित थी। विष्णु ने सरकारी स्कूल से पढ़ाई की और रोज़ साइकिल से स्कूल जाया करते थे। पढ़ाई में वे औसत छात्र थे, लेकिन उनका सपना असाधारण था—अफसर बनना।
BA करने के बाद विष्णु ने MPPSC की तैयारी शुरू की। उन्होंने सिलेबस को समझते हुए तय समय-सारिणी के अनुसार पढ़ाई शुरू की। वर्ष 2020 में पहले प्रयास में वे इंटरव्यू तक पहुंचे, लेकिन चयन नहीं हो सका। उस समय उनकी उम्र महज 21 वर्ष थी।
दूसरे प्रयास में 2021 में वे मुख्य परीक्षा में असफल रहे। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। 2022 में तीसरे प्रयास में फिर इंटरव्यू तक पहुंचे, लेकिन एक बार फिर सफलता हाथ नहीं लगी। इस दौरान कई लोगों ने उन्हें तैयारी छोड़ने की सलाह दी, लेकिन पिता का भरोसा और खुद पर विश्वास बना रहा।
आखिरकार वर्ष 2023 में मेहनत रंग लाई। विष्णु गुर्जर ने MPPSC परीक्षा में सफलता हासिल की और सहकारिता विस्तार अधिकारी (CEO) के पद पर चयनित हुए। वे अपने गांव और क्षेत्र के पहले ऐसे अधिकारी बने, जहां कभी PSC का नाम भी अनजान था।
विष्णु गुर्जर की सफलता यह संदेश देती है कि असफलता अंत नहीं होती, बल्कि सही दिशा में की गई मेहनत और धैर्य अंततः सफलता का रास्ता खोल देता है। उनकी कहानी आज देश के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है।