
मुंबई: बॉम्बे हाई कोर्ट ने रायगड जिले के एक स्कूल में प्रोबेशनरी सहायक शिक्षक की बर्खास्तगी को बरकरार रखा है। शिक्षक पर आरोप था कि उन्होंने स्कूली छात्राओं को वॉट्सऐप के माध्यम से रोमांटिक संदेश भेजे थे।
जस्टिस सोमशेखर सुंदरेशन ने कहा कि शिक्षक का अनुचित आचरण गंभीर था और इससे छात्रों के अभिभावकों तथा स्थानीय समुदाय में शिकायतें आई थीं। कोर्ट ने स्कूल ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ शिक्षक द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया। जस्टिस सुंदरेशन ने स्पष्ट किया कि इस तरह के मामलों में स्कूल प्रबंधन का जीरो टॉलरेंस दृष्टिकोण पूरी तरह से न्यायसंगत है।
मामले का विवरण:
शिक्षक को 29 फरवरी 2020 को रायगड जिले के स्कूल में तीन साल की प्रोबेशन अवधि के लिए सहायक शिक्षक के रूप में नियुक्त किया गया था। दिसंबर 2022 में स्कूल को यह जानकारी मिली कि शिक्षक ने कुछ छात्राओं को अनुचित संदेश भेजे थे। शिक्षक ने इसके लिए लिखित माफी भी मांगी थी, लेकिन अभिभावक इससे संतुष्ट नहीं थे। इसके बाद शिक्षक को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया।
अगस्त 2024 में स्कूल ट्रिब्यूनल ने शिक्षक की अपील खारिज की थी। शिक्षक के वकील ने तर्क दिया कि प्रोबेशन अवधि पूरी होने के बाद उन्हें स्थायी कर्मचारी की तरह माना जाना चाहिए था और अपीलकर्ता को अपनी बात रखने का अवसर दिया जाना चाहिए था।
कोर्ट का निर्णय:
जस्टिस सुंदरेशन ने कहा कि भविष्य में इस तरह की परेशानियों से बचने के लिए स्कूल प्रबंधन को ऐसे मामलों में जीरो टॉलरेंस पॉलिसी अपनाने का अधिकार है। प्रबंधन के पास शिक्षक को एक महीने की नोटिस और वेतन देकर प्रोबेशन अवधि समाप्त करने का पूरा अधिकार था।