
मुंबई/बारामती: दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद उनकी नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में विलय को लेकर चर्चा चल रही है। हालांकि फिलहाल दोनों गुटों के विलय की संभावना कम दिखाई दे रही है। एनसीपी के एक धड़े का मानना है कि विलय से पहले सुनेत्रा पवार को पार्टी में अपनी पकड़ मजबूत करनी होगी।
एनसीपी के वरिष्ठ नेता शरद पवार के नेतृत्व वाला गुट विलय के पक्ष में है और उनका कहना है कि यह कदम दिवंगत अजित पवार की “अंतिम इच्छा” थी। एनसीपी (एसपी) नेता अनिल देशमुख ने भी कहा कि सभी को विलय के लिए कदम उठाने चाहिए, ताकि पार्टी एकजुट रहे।
सुनेत्रा पवार की स्थिति
अजित पवार खेमा फिलहाल विलय के पक्ष में नहीं है। उनका कहना है कि विलय होने पर पार्टी के फैसले किसके हाथ में होंगे – सुनेत्रा पवार या शरद पवार – यह स्पष्ट नहीं है। इस धड़े का मानना है कि विलय का समय उचित होना चाहिए, ताकि पार्टी पर सुनेत्रा पवार का नियंत्रण सुनिश्चित रहे।
पूर्व मंत्री और एनसीपी विधायक माणिकराव कोकाटे ने स्पष्ट किया है कि पार्टी का नेतृत्व अजित पवार के उत्तराधिकारी यानी सुनेत्रा पवार को ही मिलना चाहिए। उन्होंने कहा, “दादा का उत्तराधिकारी उनके परिवार से ही होना चाहिए। हम सभी सुनेत्रा पवार के साथ खड़े हैं।”
पारिवारिक संघर्ष और पार्टी की भविष्य योजना
एनसीपी में पहले भी यह विवाद रहा है कि पार्टी पर नियंत्रण किसके हाथ में हो। अजीत पवार और शरद पवार के बीच इसी को लेकर मतभेद थे। फिलहाल यह सिलसिला जारी है। हालांकि पार्टी सूत्रों का कहना है कि पवार परिवार एकजुट है और अंतिम फैसला सुनेत्रा पवार ही लेंगी।
विलय को लेकर आने वाले दिनों में स्थिति साफ होगी, लेकिन फिलहाल एनसीपी के दोनों गुटों के बीच समय और रणनीति को लेकर पेच फंसा हुआ है।