Friday, January 30

जनकपुर से कनेक्शन और मुगलिया शासन: समस्तीपुर जिले का ऐतिहासिक सफर

समस्तीपुर। हर शहर की अपनी एक कहानी होती है और समस्तीपुर भी इससे अछूता नहीं है। समय के साथ शहर का स्वरूप बदलता गया और कभी-कभी शहर का नाम भी। समस्तीपुर का प्राचीन नाम सरैसा था। कुछ मान्यताओं के अनुसार इसे प्राचीन समय में सोमवती कहा जाता था, जो धीरे-धीरे बदलकर सोमवस्तीपुर, समवस्तीपुर और अंततः समस्तीपुर बन गया।

This slideshow requires JavaScript.

इतिहास गवाह है कि समस्तीपुर मिथिला के राजा जनक के शासनकाल में उनके नियंत्रण में था। विदेह साम्राज्य के अंत के बाद यह लिच्छवी गणराज्य का हिस्सा बना। इसके बाद यह क्षेत्र मौर्य, शुंग, कण्व और गुप्त साम्राज्यों के अधीन रहा। चीनी यात्रिक ह्वेनसांग के विवरणों के अनुसार यह हर्षवर्धन के साम्राज्य के अंतर्गत भी था।

13वीं सदी में पश्चिम बंगाल के मुसलमान शासक हाजी शम्सुद्दीन इलियास के समय मिथिला और तिरहुत का बंटवारा हुआ। उत्तर में सुगौना क्षेत्र ओईनवार राजाओं के नियंत्रण में था, जबकि दक्षिणी और पश्चिमी भाग शम्सुद्दीन के अधीन था। 14वीं से 16वीं सदी तक समस्तीपुर दरभंगा के ओईनवार राजाओं के अधीन रहा। इन शासकों ने कला, संस्कृति और साहित्य को बढ़ावा दिया। शिवसिंह, भैरवसिंह और अन्य राजाओं द्वारा जारी किए गए सोने-चांदी के सिक्के आज भी समस्तीपुर के ऐतिहासिक महत्व का प्रमाण हैं।

17वीं सदी के बाद अंग्रेजों के शासन में, 1865 में समस्तीपुर अनुमंडल के रूप में तिरहुत मंडल के अधीन आया। 14 नवंबर 1948 को इसे दरभंगा प्रमंडल से अलग कर स्वतंत्र जिला घोषित किया गया।

समस्तीपुर का ऐतिहासिक महत्व सिर्फ शासन और राजनीतिक बदलाव तक सीमित नहीं है। इस जिले का जनकपुर के श्रीराम संबंध से भी गहरा कनेक्शन है। आज समस्तीपुर में चार अनुमंडल हैं—समस्तीपुर, रोसड़ा, दलसिंहसराय और पटोरी। प्रमुख प्रखंडों में समस्तीपुर, कल्याणपुर पूसा, वारिसनगर, ताजपुर, खानपुर, सरायरंजन, उजियारपुर, रोसड़ा, सिंघिया, हसनपुर, बिथान, विभूतिपुर, शिवाजीनगर, दलसिंहसराय, पटोरी, विद्यापतिनगर, मोहिउद्दीननगर, मोहनपुर और मोरवा शामिल हैं।

29 जनवरी को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी समृद्धि यात्रा के दौरान समस्तीपुर को 827 करोड़ की सौगात दी, जो इस जिले के ऐतिहासिक और समृद्ध भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

 

Leave a Reply