
“फुलौरी बिना चटनी कैसे बनी…” यह गाना अक्सर शादियों और मेलों में सुनाई देता है। लेकिन इसका असली मतलब और फुलौरी किस तरह से बनती है, यह जानना कम ही लोगों के लिए आसान होता है। उत्तर प्रदेश और बिहार में फुलौरी का मतलब होता है बेसन के पकोड़े, जो तीखी चटनी के बिना अधूरे माने जाते हैं।
कुशल फूड ब्लॉगर निधि भदौरिया ने यूपी की मशहूर ‘छोले वाली फुलौरी’ की रेसिपी साझा करते हुए बताया कि कैसे बेसन, प्याज, मसाले और उबले हुए छोले मिलाकर एक बेहद कुरकुरा और स्वादिष्ट नाश्ता तैयार किया जा सकता है।
फुलौरी का असली मतलब
इस गाने का भाव है कि कुछ चीजें अपने साथी के बिना अधूरी लगती हैं। जैसे जीवन में साथी का महत्व होता है, वैसे ही बिना हरी-तिखी चटनी के पकौड़ों का स्वाद फीका रह जाता है।
फुलौरी बनाने के लिए जरूरी मसाले और बेसन
2 चम्मच बेसन में बारीक कटी प्याज, हरी मिर्च और हरा धनिया मिलाएं।
स्वाद बढ़ाने के लिए लाल मिर्च पाउडर, नमक, हींग और अजवाइन के साथ कसूरी मेथी डालें।
प्याज का प्राकृतिक पानी बेसन में मिलाकर बैटर को गहराई दें; जरूरत हो तो थोड़ा ही पानी डालें।
उबले छोले और टमाटर का ट्विस्ट
फुलौरी में उबले छोले और कटे टमाटर डालने से यह कुरकुरा होने के साथ-साथ प्रोटीन और खट्टास का अनोखा संगम देती है। यह कॉम्बिनेशन साधारण पकौड़ों से इसे विशेष सिग्नेचर डिश बनाता है।
फ्राई करने का तरीका
फुलौरी को धीमी से मध्यम आंच पर तलें। तेज आंच पर तलने से बाहर जल सकती हैं और अंदर कच्ची रह सकती हैं। मध्यम आंच पर तलने से पकौड़े सुनहरे, क्रिस्पी और पूरी तरह से पके हुए बनते हैं।
परोसते समय
सुनहरी और क्रिस्पी फुलौरियों को गरमा-गरम निकालें और तीखी धनिया-पुदीने की चटनी के साथ सर्व करें। निधि भदौरिया की यह रेसिपी यूपी-बिहार के पारंपरिक स्वादों की याद दिलाती है और हर फुलौरी प्रेमी को घर पर इसे बनाने का मौका देती है।