Wednesday, May 20

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फॉर्म-7 के दुरुपयोग का आरोप, वोटर लिस्ट से नाम काटे जाने पर कांग्रेस ने चुनाव आयोग को लिखा पत्र

 

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कांग्रेस ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के दौरान फॉर्म-7 के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। पार्टी का कहना है कि इस प्रक्रिया के जरिए बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं, जिससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

 

कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने इस संबंध में मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर कहा है कि फॉर्म-7 का इस्तेमाल कर लाखों मतदाताओं को उनके मताधिकार से वंचित करने की सुनियोजित कोशिश की जा रही है। पार्टी के अनुसार, इस मामले से जुड़ी शिकायतें राजस्थान से शुरू होकर अब गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम और केरल सहित 12 राज्यों से सामने आई हैं। कांग्रेस ने इसे एक व्यापक और संगठित प्रक्रिया करार दिया है।

 

जांच में सामने आया समान पैटर्न

 

पत्र में आरोप लगाया गया है कि जांच के दौरान एक समान पैटर्न सामने आया है, जिसके तहत केंद्रीकृत प्रणाली से पहले से छपे हुए फॉर्म-7 तैयार किए गए। इनका इस्तेमाल अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यक समुदायों और 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों जैसे विशेष वर्गों के मतदाताओं के खिलाफ सामूहिक आपत्तियां दर्ज कराने के लिए किया गया।

 

कांग्रेस का दावा है कि ये फॉर्म बाद में बूथ लेवल अधिकारियों को सौंपे गए। कई मामलों में फॉर्म में आपत्ति दर्ज कराने वाले व्यक्ति की पहचान, सही मोबाइल नंबर और वैध ईपीआईसी (मतदाता पहचान पत्र) विवरण तक दर्ज नहीं पाए गए, जबकि नियमों के तहत यह अनिवार्य है।

 

आपत्तिकर्ताओं की पहचान पर सवाल

 

पार्टी ने आरोप लगाया कि जिन लोगों के नाम आपत्तिकर्ता के रूप में दर्ज हैं, उनमें से कई ने सार्वजनिक रूप से किसी भी तरह का फॉर्म जमा करने से इनकार किया है। कुछ मामलों में ये लोग भाजपा से जुड़े बूथ लेवल एजेंट पाए गए, जबकि कई पूरी तरह अज्ञात व्यक्ति निकले।

 

कांग्रेस ने चुनाव आयोग से मांग की है कि फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग की तत्काल और स्वतंत्र जांच कराई जाए, दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए और जिन मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए गए हैं, उन्हें तुरंत मतदाता सूची में बहाल किया जाए।

 

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