
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर हो चुकी हैं और कोर्ट में जल्द सुनवाई होने की संभावना है। इस बीच सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेगी और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का इंतजार करेगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि नए नियमों पर विरोध के मद्देनजर सरकार के पास कुछ विकल्प हैं। पहला, नियमों को फिलहाल होल्ड पर रखा जाए, लेकिन इसकी संभावना कम है क्योंकि सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में होने वाली है। दूसरा, किसी भी बदलाव की स्थिति में नया हंगामा शुरू हो सकता है। तीसरा विकल्प यह है कि नियमों के खिलाफ उठाए गए मुद्दों को सुलझाने के लिए एक कमेटी बनाई जाए, जो सभी हितधारकों से विचार-विमर्श करे।
मायावती का बचाव
बीएसपी प्रमुख मायावती ने नए नियमों का बचाव किया और कहा कि विश्वविद्यालयों में जातिवादी भेदभाव को खत्म करने के लिए समता समिति बनाने के प्रावधानों का विरोध अनुचित है। उन्होंने कहा कि केवल जातिवादी मानसिकता वाले सामान्य वर्ग के लोग ही इसका विरोध कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि नियम लागू करने से पहले सर्वसम्मति और विचार-विमर्श होना चाहिए था, ताकि सामाजिक तनाव न पैदा हो।
सरकार ने भी संकेत दिया है कि किसी वर्ग, समुदाय या व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद ही नियमों में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे।