Wednesday, January 28

खेत से मां को लाने निकले थे पिता–पुत्र तेज रफ्तार बल्कर ने कुचलकर छीन ली दो जिंदगियां हादसे से उबल पड़ा जनआक्रोश, ग्रामीणों ने लगाया चक्काजाम

सतना।
जिले के कोलगवां थाना क्षेत्र में मंगलवार शाम एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा सामने आया, जिसने पूरे इलाके को गम और आक्रोश में डुबो दिया। खेत से पत्नी और मां को लेने निकले पिता–पुत्र को तेज रफ्तार बल्कर ने कुचल दिया, जिससे दोनों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। कुछ ही पलों में एक हंसता-खेलता परिवार उजड़ गया।

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हादसा इतना भीषण था कि सड़क पर हर आंख नम हो गई।

मटेहना के पास हुआ हादसा

मृतकों की पहचान शंखधर केवट (35) और उनके 7 वर्षीय मासूम बेटे सिद्धू उर्फ सिद्धार्थ के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार शंखधर अपने बेटे को बाइक पर बैठाकर खेत में बनी अहरी (झोपड़ी) से अपनी पत्नी को लेने जा रहे थे।

शाम करीब 7 बजे, जैसे ही वे मटेहना और कृपालपुर के बीच पहुंचे, सामने से तेज रफ्तार में आ रहे बल्कर ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर के बाद दोनों सड़क पर गिरे और भारी वाहन की चपेट में आ गए। मौके पर ही उनकी सांसें थम गईं।

मौके पर मचा कोहराम

हादसे की सूचना मिलते ही ग्रामीणों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। पिता और मासूम बेटे की एक साथ मौत से लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित ग्रामीणों ने मटेहना रोड पर चक्काजाम कर दिया और मुआवजे व सख्त कार्रवाई की मांग करने लगे।

ग्रामीणों ने काफी देर तक पुलिस को शव उठाने नहीं दिया। करीब एक घंटे तक सड़क पर यातायात पूरी तरह ठप रहा।

पुलिस ने संभाला मोर्चा

सूचना मिलने पर कोलगवां थाना प्रभारी सुदीप सोनी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों को समझाइश दी गई और दोषी चालक पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया गया, जिसके बाद स्थिति शांत हुई और जाम हटाया गया।

चालक हिरासत में, वाहन जब्त

पुलिस ने मौके से भागने की कोशिश कर रहे बल्कर चालक को हिरासत में ले लिया है और वाहन को जब्त कर थाने में खड़ा कराया गया है। पिता–पुत्र के शवों को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा गया है। मामले में मर्ग कायम कर विस्तृत जांच की जा रही है।

सवालों के घेरे में तेज रफ्तार

इस हादसे ने एक बार फिर तेज रफ्तार और भारी वाहनों की लापरवाही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस मार्ग पर आए दिन भारी वाहन तेज गति से गुजरते हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई।

एक पल में उजड़े इस परिवार का दर्द पूरे गांव ने महसूस किया—
जहां एक पिता अपने बेटे का हाथ थामे निकला था, वहीं दोनों की अर्थी एक साथ उठी।

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