Tuesday, June 23

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भारत-ईयू फ्री ट्रेड डील से पाकिस्तान की आर्थिक चिंताएं बढ़ीं, शहबाज सरकार को चेतावनी

 

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इस्लामाबाद/नई दिल्ली: भारत और यूरोपियन यूनियन (EU) ने 27 जनवरी को ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को अंतिम रूप दिया। यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल ट्रेड डील’ बताया। वहीं, पाकिस्तान में इस समझौते को लेकर शहबाज शरीफ की सरकार के लिए गंभीर चेतावनी भी जारी हुई है।

 

पाकिस्तान की मीडिया रिपोर्ट brief.pk के अनुसार, इस समझौते से पाकिस्तान के यूरोपीय बाजारों में लाभ पूरी तरह खत्म हो सकते हैं और इसके प्रभाव से खासकर टेक्सटाइल उद्योग को गंभीर नुकसान होने की आशंका है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह एक गंभीर आर्थिक चुनौती है, जिसके लिए तत्काल और व्यावहारिक कदम उठाने की जरूरत है।

 

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर असर:

भारत-ईयू समझौते के बाद भारतीय उत्पादों के लिए यूरोपीय बाजार और अधिक खुल जाएंगे। भारत को अब ऐसे टैरिफ लाभ मिलेंगे, जो पाकिस्तान के GSP प्लस स्टेटस के तहत मिलने वाले फायदे सीधे प्रभावित करेंगे। अनुमान है कि 2032 तक भारत का EU को निर्यात दोगुना हो सकता है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और EU के बीच व्यापार 136.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया था, जबकि पाकिस्तान के लिए यही बाजार केवल 9 अरब डॉलर का था।

 

खास सेक्टर्स पर प्रभाव:

 

टेक्सटाइल सेक्टर: पाकिस्तान के EU को होने वाले शिपमेंट का 75% हिस्सा टेक्सटाइल का है। GSP प्लस स्टेटस मिलने के बाद यह उद्योग यूरोप में तेजी से बढ़ा था, लेकिन अब भारत के FTA लाभ मिलने के बाद पाकिस्तान इस बाजार में 10% से अधिक हिस्सा खो सकता है। संभावित नुकसान सालाना 450-900 मिलियन डॉलर तक पहुँच सकता है।

एग्रीकल्चर और लेदर सेक्टर: पाकिस्तान पहले से ही विदेशी मुद्रा की कमी से जूझ रहा है। EU बाजार में अनाज, फल, सब्जियां और मछली के निर्यात पर असर पड़ेगा। भारत के विशाल एग्रीकल्चर और बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर के कारण पाकिस्तान को मुकाबला करना और कठिन हो जाएगा।

 

रणनीतिक महत्व:

इस समझौते से भारत का वैश्विक और क्षेत्रीय आर्थिक प्रभाव मजबूत होगा। EU भारत को इन्वेस्टमेंट प्रोटेक्शन एग्रीमेंट और पब्लिक प्रोक्योरमेंट एक्सेस भी दे रहा है, जिससे यूरोपीय कंपनियां पाकिस्तान के बजाय भारत में अपने ऑपरेशन बढ़ाएंगी।

 

रिपोर्ट में पाकिस्तान को भी सुझाव दिया गया है कि उसे यूरोप के साथ समान स्तर का ट्रेड डील करना होगा, नहीं तो यूरोपीय बाजार में बाहर होने का खतरा बढ़ जाएगा।

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