
देहरादून: उत्तराखंड में यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू हुए एक साल पूरे हो गए हैं। प्रदेश सरकार ने इस कानून में सुधार के लिए नया संशोधन अध्यादेश 2026 लागू किया है, जिसमें शादी और लिव-इन रिश्तों में जबरदस्ती, दबाव और धोखाधड़ी के मामलों के लिए सख्त दंड का प्रावधान किया गया है। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह की मंजूरी के साथ यह अध्यादेश तुरंत प्रभाव से लागू हो गया।
उत्तराखंड यूसीसी के तहत देश का पहला पूर्ण राज्य बन चुका है। इस एक साल के दौरान लगभग 4 लाख 70 हजार शादियां रजिस्टर्ड की गईं। लिव-इन रिलेशनशिप के लिए 68 जोड़ों ने रजिस्ट्रेशन कराया, जबकि दो जोड़ों ने लिव-इन टर्मिनेशन सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया।
नए बदलाव और प्रावधान
संशोधन अध्यादेश के मुख्य प्रावधान इस प्रकार हैं:
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शादी और लिव-इन रिलेशनशिप: जबरदस्ती, धोखाधड़ी या दबाव के मामलों में सख्त दंड।
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कानूनी बदलाव: CRPC की जगह अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023 और भारतीय न्याय संहिता-2023 लागू।
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रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया: अपर सचिव को सक्षम अधिकारी बनाया गया, लिव-इन टर्मिनेशन पर रजिस्ट्रार द्वारा सर्टिफिकेट जारी।
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सशक्त नियंत्रण: सब-रजिस्ट्रार समय सीमा में कार्रवाई न करने पर केस स्वतः रजिस्ट्रार और रजिस्ट्रार जनरल के पास भेजा जाएगा।
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जुर्माने और अपील: सब-रजिस्ट्रार पर लगाए गए जुर्माने के खिलाफ अपील का अधिकार, वसूली भूमि राजस्व के माध्यम से।
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पहचान और वैवाहिक शर्तें: शादी के समय गलत जानकारी देने पर विवाह निस्तारीकरण का प्रावधान।
सीएम पुष्कर सिंह धामी का बयान
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड में यूसीसी लागू करना उनका चुनावी वादा था और अब एक साल पूरे होने पर यह सफलतापूर्वक लागू हो गया। उन्होंने कहा कि शुरुआती दौर में यूसीसी को लेकर भ्रम फैलाने की विपक्ष की कोशिशें असफल रहीं। सीएम ने प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि यह कानून पूरे देश में प्रभावशाली साबित होगा।