Monday, June 1

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महरौली में सरकारी मिलीभगत से हुआ 200 करोड़ की संपत्ति का फ्रॉड, फर्जी दस्तावेजों से बेची गई जमीन

नई दिल्ली: साउथ एक्सटेंशन-1 में 200 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति को फर्जी दस्तावेजों के ज़रिए महज 41 करोड़ रुपये में बेचने का मामला सामने आया है। आरोप है कि इस घोटाले में महरौली स्थित सब-रजिस्ट्रार ऑफिस के कर्मचारियों की मिलीभगत भी शामिल रही।

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पुलिस सूत्रों के अनुसार, ध्रुव जालान के दादा ने 1958 में साउथ एक्सटेंशन स्थित 2292 वर्ग गज का यह प्लॉट खरीदा था। 2008 में कानूनी प्रक्रिया पूरी कर वसीयत के तहत ध्रुव जालान इसके एकमात्र मालिक बने। लेकिन हाल ही में उन्हें पता चला कि 30 जनवरी 2025 को आरोपियों ने फर्जी सेल डीड बनाकर संपत्ति को बेच दिया।

जांच में सामने आया कि एक आरोपी ने खुद को संपत्ति का GPA होल्डर बताया और दावा किया कि ध्रुव जालान के पिता ने 2018 में उसे यह अधिकार दिया था। ध्रुव ने स्पष्ट किया कि उनके पिता ने कभी ऐसे किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं किए।

शिकायत में सबसे गंभीर आरोप सब-रजिस्ट्रार ऑफिस महरौली के अधिकारियों पर है। नियमों के अनुसार, इस क्षेत्र की संपत्ति पंजीकरण उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आती। इसके बावजूद अधिकारियों ने फर्जी दस्तावेज को रजिस्टर्ड कर दिया।

ध्रुव जालान ने आरोप लगाया कि कुछ आरोपी इस फर्जी सेल डीड का इस्तेमाल बैंक से भारी भरकम लोन लेने के लिए कर रहे हैं। उन्होंने पुलिस से फरेंसिक जांच कराई जाने और स्टैंप ड्यूटी के लिए उपयोग किए गए पैसों के स्रोत का पता लगाने की मांग की है। इसके अलावा, पीड़ित परिवार ने अपनी जान के खतरे का हवाला देते हुए पुलिस से सुरक्षा की भी गुहार लगाई है।

दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने इस मामले में कई कारोबारियों, प्राइवेट लिमिटेड कंपनी और सब-रजिस्ट्रार ऑफिस महरौली के अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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