
भारतीय जनता पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के पद संभालते ही संगठनात्मक स्तर पर बड़े बदलावों की आहट तेज हो गई है। आगामी पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों को देखते हुए पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत रणनीति बनाने में जुटी है। इसी कड़ी में तमिलनाडु भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व आईपीएस अधिकारी के. अन्नामलाई को पार्टी में बड़ी राष्ट्रीय जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा जोरों पर है।
सूत्रों के अनुसार, अन्नामलाई की नितिन नवीन की राष्ट्रीय टीम में एंट्री लगभग तय मानी जा रही है। उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बनाए जाने की प्रबल संभावना जताई जा रही है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि अन्नामलाई जैसे आक्रामक और जमीनी नेता को आगे लाकर तमिलनाडु सहित दक्षिण भारत में भाजपा को निर्णायक बढ़त मिल सकती है।
तमिलनाडु चुनावों पर भाजपा का विशेष फोकस
भाजपा जहां असम में सत्ता बनाए रखने की तैयारी कर रही है, वहीं पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में पार्टी पूरी ताकत झोंकने की रणनीति पर काम कर रही है। तमिलनाडु में भाजपा ने AIADMK के नेतृत्व में एनडीए का विस्तार कर डीएमके को कड़ी चुनौती देने का संकेत दे दिया है।
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तमिलनाडु दौरे के दौरान डीएमके पर तीखे हमले किए, जिससे साफ हो गया कि पार्टी इस राज्य को लेकर किसी भी तरह की ढिलाई के मूड में नहीं है।
अन्नामलाई का प्रमोशन लगभग तय
राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि 45 वर्षीय नितिन नवीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर भाजपा ने युवा नेतृत्व को स्पष्ट संकेत दिया है। इसी रणनीति के तहत 41 वर्षीय के. अन्नामलाई को संगठन में आगे बढ़ाया जा सकता है।
सूत्रों का दावा है कि तमिलनाडु के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष को जल्द ही राष्ट्रीय स्तर पर प्रोन्नति दिए जाने की घोषणा हो सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यदि अन्नामलाई को राष्ट्रीय पद दिया जाता है, तो इससे तमिलनाडु में भाजपा को संगठनात्मक और वैचारिक मजबूती मिलेगी।
मोदी–शाह के भरोसेमंद नेता
आईपीएस सेवा छोड़कर राजनीति में आए के. अन्नामलाई की छवि एक आक्रामक और स्पष्टवादी नेता की रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दोनों ही सार्वजनिक मंचों पर उनकी कार्यशैली की सराहना कर चुके हैं।
बताया जाता है कि अन्नामलाई के प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए तमिलनाडु में भाजपा का वोट शेयर 3 प्रतिशत से बढ़कर 11 प्रतिशत तक पहुंचा, जिसे पार्टी बड़ी उपलब्धि मानती है।
चुनावी मैदान से दूर रह सकते हैं अन्नामलाई
सूत्रों के मुताबिक, अन्नामलाई के चुनाव लड़ने की संभावना कम है। पार्टी उन्हें दिल्ली-केंद्रित संगठनात्मक जिम्मेदारियां सौंप सकती है, ताकि वे राष्ट्रीय स्तर पर रणनीति और विस्तार पर फोकस कर सकें।
द्रविड़ राजनीति के बीच अन्नामलाई ने एक मजबूत वैकल्पिक आवाज के रूप में अपनी पहचान बनाई है और राज्य में उनकी खासी लोकप्रियता और फैन फॉलोइंग है।