Tuesday, March 3

आईआईटी में भी छात्र क्यों दे रहे हैं जान? शिक्षा मंत्रालय ने बनाई 3 सदस्यीय जांच कमिटी

 

This slideshow requires JavaScript.

नई दिल्ली: आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में एडमिशन मिल जाना किसी छात्र के लिए बड़ी उपलब्धि होती है, फिर भी कुछ छात्र अपनी पढ़ाई के दौरान जीवन की जंग हार जाते हैं। हाल के वर्षों में लगातार ऐसे मामले सामने आने के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने आईआईटी में छात्र आत्महत्याओं की जांच और समाधान के लिए 3 सदस्यीय कमिटी बनाई है।

आईआईटी में बढ़ती आत्महत्या की घटनाएं
ग्लोबल आईआईटी एल्युमिनाई सपोर्ट ग्रुप के आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2021 से दिसंबर 2025 तक देश के विभिन्न आईआईटी में कम से कम 65 छात्रों ने आत्महत्या की। इसमें से अकेले पिछले दो साल में 30 छात्रों की मौत हुई। ये केवल बीटेक छात्र नहीं, बल्कि यूजी, पीजी और पीएचडी के छात्र भी इस मामले में शामिल हैं।

आईआईटी कानपुर में हाल ही में दो छात्रों ने एक महीने के भीतर अपनी जान दे दी, जबकि पिछले चार महीनों में तीन छात्र आत्महत्या कर चुके हैं। पिछले दो साल में आईआईटी कानपुर में कुल नौ छात्रों की जान गई।

नए कदम और जांच का दायरा
नई कमिटी देखेगी कि संस्थान में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी गाइडलाइंस का पालन कैसे किया जा रहा है। जुलाई 2023 में उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए स्टूडेंट्स के इमोशनल और मेंटल वेल-बीइंग को लेकर फ्रेमवर्क गाइडलाइंस जारी की गई थीं।

कमिटी पुराने मामलों के पैटर्न का विश्लेषण करेगी, ताकि आत्महत्या के कारणों का पता लगाया जा सके। यह जांच करेगी कि कैंपस में काउंसलिंग सुविधाएं कितनी सुलभ हैं, फैकल्टी संवेदनशील हैं या नहीं, शिकायत निवारण प्रणाली कितनी कारगर है और एकेडेमिक व रेजिडेंशियल यूनिट्स के बीच समन्वय कैसा है। साथ ही, ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर लागू किए जा सकने वाले बेहतर उपायों की भी सिफारिश की जाएगी।

कमिटी के सदस्य और समय सीमा
कमिटी की अध्यक्षता नेशनल एजुकेशनल टेक्नोलॉजी फोरम (NETF) के चेयरमैन अनिल सहस्त्रबुद्धे करेंगे। इसके सदस्य मनोचिकित्सक डॉ. जितेंद्र नागपाल और उच्च शिक्षा संयुक्त सचिव रीना सोनोवाल हैं। कमिटी को 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया है।

देश में छात्र आत्महत्याओं का व्यापक पैमाना
ये घटनाएं केवल आईआईटी तक सीमित नहीं हैं। बोर्ड परीक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा के दौरान छात्रों में तनाव के कारण यह समस्या व्यापक रूप ले रही है। नेशनल क्राइम रेकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के अनुसार 2023 में भारत में 13,000 से अधिक छात्रों ने विभिन्न कारणों से अपनी जान दे दी।

देश के सामने यह गंभीर सवाल है कि उच्च शिक्षा और प्रतियोगी सफलता के बावजूद छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए और क्या कदम उठाए जा सकते हैं।

 

Leave a Reply