Thursday, June 18

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युवराज मेहता मौत मामला: क्या दबाव में पास हुआ था 90 डिग्री वाला मोड़? गौतमबुद्ध नगर में एकमात्र है यह मोड़

 

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नोएडा। सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत के मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। इनमें भ्रष्टाचार और सड़क सुरक्षा में लापरवाही के गंभीर मामले शामिल हैं।

 

जांच में सामने आया है कि जिस प्लॉट के बाहर यह हादसा हुआ, उसके लेआउट प्लान में 90 डिग्री के तीखे मोड़ को नोएडा अथॉरिटी ने मंजूरी दी थी। यह लेआउट प्लान 27 जनवरी 2012 को पास किया गया था। स्पोर्ट्स सिटी एससी-2 ए-3 का यह प्लॉट 27,185 वर्ग मीटर का है, जिसे एसजेड विजटाउन बिल्डर को सब-लीसी के तौर पर स्पोर्ट्स सिटी को फंसाने वाले निर्मल सिंह ने बेचा था।

 

नोएडा अथॉरिटी के आर्किटेक्ट प्रवीण श्रीवास्तव ने इस लेआउट को मंजूरी दी थी। हालांकि प्रवीण श्रीवास्तव का निधन हो चुका है, लेकिन उनके बनाए गए इस लेआउट में खामियां अब भी नजरअंदाज नहीं की जा सकतीं।

 

सड़क की तकनीकी स्थिति

 

प्लॉट के चारों तरफ सड़क की चौड़ाई 30 और 45 मीटर है, जो सीधे 90 डिग्री के मोड़ पर कटती है। पूरे नोएडा में यह इकलौता ऐसा मोड़ है। विशेषज्ञों के अनुसार, 90 डिग्री के मोड़ पर वाहन की गति अधिक होती है और यदि सुपर एलिवेशन, कैट्स आई, क्रैश बैरियर और हाई विज़िबिलिटी साइन नहीं लगाए जाएं, तो दुर्घटना की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। इंडियन रोड कांग्रेस (IRC) की गाइडलाइन के अनुसार ऐसे स्थानों पर गार्ड रेल और फिजिकल बैरियर लगाना अनिवार्य है, लेकिन हादसे वाली सड़क पर ये सभी सुरक्षा इंतजाम पूरी तरह नदारद थे।

 

मंजूरी के दौरान ग्राउंड ऑडिट न होना

 

सवाल उठता है कि जब 2012 में यह प्लान पास हुआ, तब सड़क सुरक्षा ऑडिट क्यों नहीं किया गया। एक्सपर्ट विजय मिश्रा का कहना है कि ऐसे मोड़ को तत्काल ब्लैक स्पॉट घोषित कर IRC गाइडलाइन के अनुसार सुरक्षा उपाय किए जाने चाहिए थे।

 

नियमों को ताक पर रखकर दी गई मंजूरी

 

2009 से 2012 के बीच नोएडा अथॉरिटी के चेयरमैन और सीईओ रहे मोहिंदर सिंह, राकेश बहादुर और संजीव सरन के कार्यकाल में स्पोर्ट्स सिटी एससी-2 के 300 एकड़ प्लॉट की जमीन आवंटित हुई और लेआउट प्लान पास किया गया। सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार यह तीन साल का समय अथॉरिटी के जमीन आवंटन में सबसे अधिक धांधलेबाजी और अनियमितताओं वाला दौर था। उस समय बिल्डर, अथॉरिटी और सत्ता का गठजोड़ नियमों को ताक पर रखकर काम करता रहा।

 

हकीकत में सड़क की हालत

 

हादसे वाली सड़क पर न तो एडवांस वार्निंग साइन लगे थे, न ही स्पीड कंट्रोल के ठोस इंतजाम। रंबल स्ट्रिप्स, क्रैश बैरियर और पर्याप्त रोड मार्किंग पूरी तरह नदारद थे। अंधे मोड़ पर ड्राइवर को पहले से सतर्क करने वाले विजुअल संकेत भी मौजूद नहीं थे। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मोड़ हाई रिस्क जोन और एक्सीडेंट प्रोन लोकेशन श्रेणी में आता है, और यहाँ सुरक्षा मानकों की अनदेखी ने युवराज मेहता की जान ले ली।

 

 

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