
नई दिल्ली। बदलती जीवनशैली, अनियमित दिनचर्या और गलत खान-पान का असर सबसे पहले हमारे पेट पर पड़ता है। आज गैस, एसिडिटी, पेट फूलना, डकारें, कब्ज और अपच जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। अधिकतर लोग इन्हें मामूली मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो बार–बार गैस और एसिडिटी होना शरीर का खतरे का संकेत भी हो सकता है।
फोर्टिस हॉस्पिटल, शालीमार बाग के डॉ. पंकज शर्मा (डायरेक्टर, रोबोटिक, बेरिएट्रिक, लेप्रोस्कोपिक एंड जनरल सर्जरी) के अनुसार, अगर पाचन तंत्र लंबे समय तक प्रभावित रहता है, तो इसके पीछे कोई गंभीर बीमारी छिपी हो सकती है। ऐसे में समय रहते जांच कराना बेहद जरूरी है।
गैस और एसिडिटी के प्रमुख कारण
डॉ. शर्मा बताते हैं कि अनियमित जीवनशैली पाचन तंत्र को कमजोर कर देती है। इसके मुख्य कारण हैं—
- कभी भी और देर रात खाना
- तला-भुना, ज्यादा मसालेदार भोजन
- जल्दी-जल्दी खाना और ठीक से न चबाना
- अधिक चाय-कॉफी और कोल्ड ड्रिंक्स
- कम पानी पीना
- लंबे समय तक बैठे रहना
- तनाव और नींद की कमी
इन आदतों के कारण एसिड रिफ्लक्स, अपच, गैस और सीने में जलन जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं।
ये 7 लक्षण दिखें तो न करें अनदेखी
डॉक्टर के मुताबिक, अगर गैस और एसिडिटी के साथ नीचे दिए गए लक्षण दिखाई दें, तो इसे गंभीर माना जाना चाहिए—
- लगातार सीने में तेज जलन
- ठोस भोजन निगलने में परेशानी
- उल्टी में खून आना
- काले रंग का मल (स्टूल)
- बार-बार या तेज पेट दर्द
- बिना कारण तेजी से वजन कम होना
- रात में खांसी, घुटन या बेचैनी
ये लक्षण GERD, पेट के अल्सर, गॉलब्लैडर स्टोन, हायटल हर्निया या पेट की अन्य गंभीर बीमारियों की ओर इशारा कर सकते हैं।
पेट फूलना हो सकता है बड़ा खतरा
डॉ. शर्मा का कहना है कि लगातार पेट फूलना और भारीपन कई बार गॉलब्लैडर की समस्या से भी जुड़ा होता है, खासकर जब फैटी भोजन के बाद दर्द और असहजता बढ़ जाए। ऐसे मामलों में अल्ट्रासाउंड और एंडोस्कोपी जैसी जांच बेहद जरूरी हो जाती है।
लाइफस्टाइल सुधार से कैसे मिलेगी राहत
डॉक्टर के अनुसार, रोजमर्रा की आदतों में छोटे-छोटे बदलाव करके पेट की समस्याओं से काफी हद तक राहत पाई जा सकती है—
- दिन की शुरुआत गुनगुने पानी से करें
- भोजन तय समय पर लें
- रात का खाना सोने से 2–3 घंटे पहले खाएं
- तला-भुना और भारी भोजन कम करें
- हर कौर को अच्छे से चबाएं
- दिन में 8–10 गिलास पानी पिएं
- रोज 20–30 मिनट टहलें या हल्की एक्सरसाइज करें
- चाय-कॉफी सीमित रखें
- तनाव कम करने के लिए योग, मेडिटेशन या गहरी सांस का अभ्यास करें
डॉक्टर के अनुसार, इन उपायों से 60–70 प्रतिशत लोगों में गैस और एसिडिटी की समस्या में साफ सुधार देखा गया है।
डॉक्टर की अहम सलाह
डॉ. पंकज शर्मा चेतावनी देते हैं कि बार-बार गैस और एसिडिटी होना शरीर का अलार्म है। इसे मामूली समझकर नजरअंदाज करना आगे चलकर गंभीर जटिलताओं को जन्म दे सकता है। सही समय पर जांच, बीमारी की सही पहचान और इलाज से बड़ी परेशानी से बचा जा सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी पर आधारित है। किसी भी समस्या या इलाज के लिए डॉक्टर की सलाह जरूरी है।