Tuesday, January 20

अमेरिका के साथ ट्रेड डील को लेकर ईयू और यूके की गलती, भारत ने खेला बड़ा रणनीतिक कदम

नई दिल्ली।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया भर में टैरिफ को एक ताकतवर हथियार बना लिया है। ग्रीनलैंड पर कब्जे को लेकर ट्रंप की धमकियों ने यूरोपीय देशों के लिए परेशानी खड़ी कर दी। वहीं, भारत ने अमेरिका के साथ ट्रेड डील में रणनीतिक धैर्य दिखाकर खुद के पक्ष में बड़ा फायदा किया है।

This slideshow requires JavaScript.

ईयू और यूके पर दबाव
पिछले साल अमेरिका ने यूरोपीय संघ (ईयू) और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के साथ व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बावजूद ट्रंप ने ग्रीनलैंड मामले को लेकर इन देशों पर टैरिफ की धमकी दी। इस दबाव ने ईयू सांसदों को ईयूयूएस व्यापार सौदे को मंजूरी देने से रोक दिया। फाइनेंशियल टाइम्स के अनुसार यूरोपीय देश अब लगभग 93 अरब यूरो तक के जवाबी उपाय तैयार कर रहे हैं, जिसमें टैरिफ और अमेरिकी कंपनियों के लिए बाजार तक पहुंच पर प्रतिबंध शामिल हो सकता है।

टैरिफ बना ट्रंप का हथियार
विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रंप ने किसी भी देश के साथ ट्रेड डील कर ली हो, लेकिन यह देश को भविष्य के टैरिफ से सुरक्षा नहीं दे सकती। टैरिफ अब उनका मुख्य रणनीतिक और भू-राजनीतिक हथियार बन गया है।

भारत ने दिखाया धैर्य
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता लंबे समय से अटका हुआ है। ट्रंप चाहते थे कि भारत एग्रीकल्चर और डेयरी सेक्टर में अमेरिकी कंपनियों को प्रवेश दे। रूस के तेल पर भी भारत को कुल 50% टैरिफ लगाया गया। इसके बावजूद भारत ने जल्दी में कोई निर्णय नहीं लिया।

भारत के वार्ताकारों ने रणनीतिक धैर्य अपनाया, यह समझते हुए कि जल्दी हासिल किया गया सौदा अल्पकालिक लाभ तो दे सकता है, लेकिन दीर्घकालिक सुरक्षा कम है। इस कदम ने भारत को अमेरिका के साथ मजबूत और संतुलित स्थिति में रखा, जबकि ईयू और यूके को अब टैरिफ और व्यापार दबाव का सामना करना पड़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यह चाल रणनीतिक गहराई और दूरदर्शिता का उदाहरण है, जो व्यापारिक और भू-राजनीतिक हितों के संतुलन को बनाए रखने में मदद करती है।

 

Leave a Reply