Tuesday, January 20

SIF: स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड बना निवेश का नया विकल्प, मार्केट लीडर भी उतर रहे इस रास्ते पर

मुंबई।
बाजार में निवेश के विकल्प सीमित होते जा रहे हैं, लेकिन अब स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड (SIF) निवेशकों के लिए नया अवसर पेश कर रहा है। पिछले साल सेबी से इसकी मंजूरी मिलने के बाद देश की प्रमुख एसेट मैनेजमेंट कंपनियां इस सेगमेंट में कदम रख रही हैं। इसी कड़ी में आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड ने दो नई SIF निवेश रणनीतियों लॉन्च की हैं।

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टॉप एएमसी ने लॉन्च किया नया सेगमेंट
देश की शीर्ष एसेट मैनेजमेंट कंपनियों में SBI, HDFC और ICICI प्रूडेंशियल शामिल हैं। ICICI प्रूडेंशियल ने SIF के तहत iSIF इक्विटी एक्सटॉप 100 लॉन्गशॉर्ट फंड और iSIF हाइब्रिड लॉन्गशॉर्ट फंड लॉन्च किए हैं। इन दोनों निवेश रणनीतियों के लिए न्यू फंड ऑफर (NFO) 30 जनवरी 2026 तक खुला रहेगा। यह उन निवेशकों के लिए तैयार किया गया है जो लचीला पोर्टफोलियो चाहते हैं, जहां बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव और वोलैटिलिटी अधिक हो।

SIF क्या है और किसके लिए है
SIFs को म्यूचुअल फंड और PMS/AIF उत्पादों के बीच मध्यस्थ विकल्प के रूप में पेश किया गया है। इसमें प्रति पैन न्यूनतम 10 लाख रुपये का निवेश करना होता है। SIF म्यूचुअल फंड्स की पारदर्शिता और रेगुलेटरी निगरानी को अधिक लचीलापन के साथ जोड़ता है। इसमें लॉन्गशॉर्ट रणनीति और तय सीमा तक डेरिवेटिव्स का उपयोग करने की अनुमति होती है।

ICICI प्रूडेंशियल के ईडी और CIO संकरन नरेन के अनुसार, “SIF निवेशकों को अलग और खास रणनीतियां देते हैं, जो बदलते बाजार हालात के साथ खुद को ढाल सकती हैं। हमारा मकसद बेहतर रिस्कएडजस्टेड रिटर्न देना है।”

कहां होता है निवेश
iSIF इक्विटी एक्स-टॉप 100 लॉन्ग-शॉर्ट फंड मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में निवेश करता है। यह मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में लॉन्ग पोजिशन और चुनिंदा महंगे शेयरों में शॉर्ट पोजिशन लेता है। इस रणनीति में बॉटमअप स्टॉक सेलेक्शन और सेक्टरल इन-हाउस रिसर्च का इस्तेमाल होता है। बेंचमार्क Nifty 500 TRI है।

जोखिम और सावधानियां
SIF में हाई रिस्क होता है। लॉन्ग और शॉर्ट दोनों पोजिशन गलत दिशा में जाएं तो नुकसान हो सकता है। इसके अलावा कम लिक्विडिटी और जटिल रणनीतियां जैसे ऑप्शन ट्रेडिंग और डेरिवेटिव्स का उपयोग भी जोखिम बढ़ाते हैं।

निष्कर्ष
SIF अब निवेशकों के लिए नया और लचीला विकल्प बन गया है, जो पारंपरिक म्यूचुअल फंड्स और PMS/AIFs के बीच का गैप भरता है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि इस में निवेश करने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञों से परामर्श जरूर करें, क्योंकि बाजार की परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं।

 

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