
भारत में फेफड़ों का कैंसर तेजी से एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के आंकड़ों के अनुसार, देश में फेफड़ों के कैंसर के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। वर्ष 2015 में जहां इसके करीब 63,700 मामले दर्ज किए गए थे, वहीं 2025 तक यह संख्या बढ़कर लगभग 81,000 से अधिक होने का अनुमान है। चिंता की बात यह है कि इस बीमारी से हर साल लगभग 60 हजार लोगों की जान चली जाती है।
क्यों बढ़ रहे हैं फेफड़ों के कैंसर के मामले
विशेषज्ञों के अनुसार, फेफड़ों के कैंसर की सबसे बड़ी वजह धूम्रपान है। भारत में इस समय करीब 10 करोड़ वयस्क स्मोकर हैं और फेफड़ों के कैंसर के 85 से 90 प्रतिशत मामले सीधे तौर पर सिगरेट और तंबाकू सेवन से जुड़े होते हैं। इसके अलावा बढ़ता वायु प्रदूषण भी एक बड़ा कारण बनता जा रहा है। यह बीमारी पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं को भी तेजी से अपनी चपेट में ले रही है।
दुखद पहलू यह है कि ज्यादातर मरीज तब डॉक्टर के पास पहुंचते हैं, जब बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है। इसी कारण करीब 80 से 85 प्रतिशत मामलों में इलाज की संभावनाएं बेहद सीमित रह जाती हैं और मृत्यु दर अधिक होती है।
देर से दिखने वाले 5 खतरनाक लक्षण
डॉक्टरों का कहना है कि फेफड़ों के कैंसर के शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य बीमारियों जैसे लगते हैं, इसलिए लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। यही एक बड़ी भूल जानलेवा साबित होती है।
- लगातार खांसी
अगर खांसी कई हफ्तों तक बनी रहे, पहले से ज्यादा तेज या खुरदरी हो जाए, या उसके साथ खून या जंग जैसे रंग का बलगम आए, तो यह गंभीर संकेत हो सकता है। - सीने में दर्द या बेचैनी
फेफड़ों के कैंसर में सीने में दर्द हो सकता है, जो खांसने, गहरी सांस लेने या हंसने पर बढ़ जाता है। यह दर्द कंधों या पीठ तक भी फैल सकता है। - सांस फूलना
बिना किसी भारी काम के भी सांस फूलना, थोड़ा चलने या सीढ़ियां चढ़ने पर हांफना इस बात का संकेत हो सकता है कि फेफड़ों में कोई रुकावट है। - बिना वजह वजन कम होना
अगर बिना डाइट या एक्सरसाइज के अचानक वजन घटने लगे और साथ में थकान बनी रहे, तो यह कैंसर का लक्षण हो सकता है। - बार-बार फेफड़ों में इंफेक्शन
बार-बार ब्रोंकाइटिस या निमोनिया होना भी खतरे की घंटी है। फेफड़ों में ट्यूमर होने पर इंफेक्शन जल्दी होता है और ठीक होने में समय लगता है।
बचाव और सावधानी
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि धूम्रपान से दूरी बनाना फेफड़ों के कैंसर से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। इसके साथ ही प्रदूषण से बचने के लिए बाहर निकलते समय मास्क पहनें, नियमित ब्रीदिंग एक्सरसाइज करें और अगर कोई लक्षण लंबे समय तक बने रहें तो तुरंत जांच कराएं।
समय पर पहचान ही इस बीमारी से बचने का सबसे बड़ा हथियार है। लक्षणों को नजरअंदाज करना एक ऐसी गलती है, जो कई बार जानलेवा साबित हो जाती है।