
इंदौर, 19 जनवरी 2026: सुप्रीम कोर्ट ने इंदौर के चंदन नगर थाना प्रभारी (SHO) इंद्रमणि पटेल को जांच कर्तव्यों से तुरंत हटाकर पुलिस लाइन भेजने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा है कि एक ही गवाहों का बार-बार इस्तेमाल करना कानून के शासन के लिए कलंक है और इससे न्याय की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि SHO पटेल किसी भी तरह से थाना मामलों में दखल देने की कोशिश करेंगे, तो इंदौर के कमिश्नर ऑफ पुलिस स्वयं जिम्मेदार होंगे। साथ ही, राज्य सरकार को आदेश का पालन करने की पुष्टि करते हुए हलफनामा भी देना होगा।
सुप्रीम कोर्ट का कहना
कोर्ट ने कहा, “प्रतिवादी नंबर 4 (SHO) ने कथित अपराधों के समर्थन में एक ही गवाहों का बार-बार इस्तेमाल किया, यानी ‘स्टॉक गवाह’। यह तरीका जांच की निष्पक्षता और समानता की मूल भावना को चोट पहुंचाता है और कानून के शासन वाले देश के लिए अनादरणीय है।”
हाई कोर्ट में भी संज्ञान
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में चल रहे एक मामले का भी संज्ञान लिया। हाई कोर्ट ने 4 दिसंबर 2025 को कहा था कि पटेल ने 26 नवंबर 2025 को राजा दुबे को बिना केस दर्ज किए अवैध रूप से हिरासत में लिया और हथकड़ी लगाई, जो अनुच्छेद 21 के तहत नागरिक के मौलिक अधिकारों का घोर उल्लंघन है।
पॉकेट गवाहों का मामला
NBT ने पहले इस मामले की जांच में बताया था कि मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले में छह लोग कई मामलों में सरकारी गवाह (पॉकेट गवाह) के रूप में बार-बार पेश किए गए। डिजिटल ट्रैकिंग रिकॉर्ड से यह बात सामने आई थी, जिसने पूरे मामले को तूल दिया।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से इंदौर पुलिस प्रशासन के लिए यह साफ संदेश है कि कानून और निष्पक्ष जांच में कोई समझौता नहीं किया जाएगा।