
जयपुर: राजधानी जयपुर में अब ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना पहले जैसी आसान प्रक्रिया नहीं रह गई है। जगतपुरा स्थित आरटीओ कार्यालय में ऑटोमैटेड ड्राइविंग ट्रायल ट्रैक शुरू होने के बाद लाइसेंस जारी करने की पूरी व्यवस्था बदल गई है। नई प्रणाली लागू होने के बाद इसका असर तुरंत ही दिखने लगा है। बीते तीन दिनों में केवल 40 लोगों ने ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन किया, जिनमें से केवल तीन ही अभ्यर्थी परीक्षा में सफल हो सके। पास होने का प्रतिशत लगभग 7.5% रहा।
ऑटोमैटेड ट्रायल से आवेदक पीछे हट रहे
जयपुर आरटीओ का ऑटोमैटेड ट्रायल सिस्टम पूरी तरह तकनीक आधारित है। इस ट्रैक पर वाहन की गति, संतुलन, लेन अनुशासन, संकेतों का पालन और समग्र ड्राइविंग कौशल को सेंसर और कैमरों की मदद से जांचा जाता है। मानवीय हस्तक्षेप न होने के कारण किसी भी तरह की ढील या सिफारिश की गुंजाइश नहीं रहती। यही कारण है कि कई लोग आवेदन करने से ही पीछे हट रहे हैं। अन्य राज्यों में लागू इस सिस्टम में पास होने का औसत 20-25 प्रतिशत रहा है।
दलालों पर लगाम, लेकिन नई चुनौती सामने
नई प्रणाली से दलालों की भूमिका लगभग समाप्त हो गई है, लेकिन जयपुर शहर में दो अलग-अलग आरटीओ कार्यालय होने के कारण स्थिति जटिल हो गई है। जगतपुरा आरटीओ में ऑटोमैटेड ट्रायल अनिवार्य है, वहीं विद्याधर नगर कार्यालय में ड्राइविंग लाइसेंस अभी भी पुराने मैनुअल सिस्टम से जारी किए जा रहे हैं।
विद्याधर नगर की ओर बढ़ रहा रुझान
ऑटोमैटेड ट्रायल से बचने के लिए कई आवेदक विद्याधर नगर कार्यालय का रुख कर रहे हैं। इससे जिले में ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में एकरूपता और पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
आरटीओ ने की एकरूप व्यवस्था की मांग
इस स्थिति को गंभीर मानते हुए आरटीओ प्रथम राजेन्द्र सिंह शेखावत ने परिवहन विभाग को पत्र लिखा है। पत्र में मांग की गई है कि जयपुर जिले में सभी ड्राइविंग लाइसेंस केवल जगतपुरा आरटीओ कार्यालय से ही जारी किए जाएं, ताकि ऑटोमैटेड ट्रायल सिस्टम समान रूप से लागू किया जा सके।
सड़क सुरक्षा के लिहाज से जरूरी बदलाव
परिवहन और सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऑटोमैटेड ड्राइविंग ट्रायल सिस्टम समय की आवश्यकता है। इससे निष्पक्ष मूल्यांकन होता है और सड़कों पर कुशल चालकों की संख्या बढ़ती है। हालांकि, इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पूरे जिले में एक समान व्यवस्था लागू करना जरूरी है।