
झालावाड़/जयपुर: राजस्थान की राजनीति में खास पहचान रखने वाली वसुंधरा राजे ने 15 जनवरी को अपने बेटे सांसद दुष्यंत सिंह की तीन दिवसीय यात्रा के दौरान जनता के बीच नया सियासी संदेश दिया। यात्रा की शुरुआत झालावाड़ के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल उन्हेल नागेश्वर से हुई।
जनता के बीच किया संवाद
वसुंधरा राजे ने कहा कि “ज्यादातर नेता चुनाव के समय आते हैं, जीतकर चले जाते हैं और पूरे 5 साल एसी में रहते हैं। पर हम ऐसा नहीं करते।”
उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र के लोग केवल मतदाता नहीं बल्कि भाग्य निर्माता हैं।
राजे ने अपने अनुभव साझा किए और बताया कि जब वे सांसद थीं, तब पदयात्रा करती थीं और पांव में छाले पड़ने पर उन्हें पिन से फोड़कर आगे बढ़ती थीं।
बेटे दुष्यंत सिंह की तारीफ
वसुंधरा राजे ने दुष्यंत सिंह की जनता से जुड़ने की सक्रियता की जमकर तारीफ की।
उन्होंने कहा कि यह यात्रा राजनीतिक नहीं, बल्कि अपनों के लिए अपनों की ओर से यात्रा है।
जनता की आवाज सुनना और उनके सपनों को पूरा करना इस यात्रा का उद्देश्य बताया।
संदेश साफ
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का यह संदेश सियासी पंडितों के लिए भी मायने रखता है। उन्होंने यह दिखाने की कोशिश की कि वे और उनका परिवार जनता के बीच लगातार जुड़े रहते हैं और सिर्फ चुनाव के समय नहीं आते।
संक्षेप: वसुंधरा राजे ने बेटे दुष्यंत सिंह की यात्रा के दौरान जनता के बीच सत्ता और सेवा के बीच के फर्क को स्पष्ट किया और यह संदेश दिया कि उनका परिवार क्षेत्र के लोगों के साथ हर समय जुड़ा रहता है।