
चंपारण (आशुतोष कुमार पांडेय): बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा की शुरुआत चंपारण से हुई, लेकिन अब यह ऐतिहासिक धरती स्वाद और पाक कला के मामले में भी वैश्विक पहचान बना रही है। खासकर यहाँ के मर्चा चूड़ा और अहुना मटन ने दुनिया भर में बिहार का नाम रोशन कर दिया है।
पश्चिम चंपारण के मैनाटांड, गौनाहा, नरकटियागंज, रामनगर और चनपटिया ब्लॉकों में उगने वाला मर्चा चूड़ा अपनी अनूठी मिठास और कोमलता के लिए प्रसिद्ध है। हिमालय से आने वाले पानी और स्थानीय मिट्टी के खास खनिज इसे अन्य चावल से अलग बनाते हैं। 2023 में जीआई टैग मिलने के बाद इसकी मांग राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ गई है। वर्तमान में इसका भाव 150 रुपये प्रति किलो तक पहुँच चुका है और इसकी खेती का क्षेत्रफल 1,000 हेक्टेयर से बढ़कर 3,000 हेक्टेयर हो गया है।
वहीं, चंपारण मटन या अहुना मटन ने मांसाहारी प्रेमियों के बीच धूम मचा दी है। मिट्टी के बर्तन में धीमी आंच पर पकने वाला यह व्यंजन अपनी सोंधी खुशबू और मुलायम मांस के कारण लोकप्रिय हो चुका है। इसे ‘चंपारण मीट हाउस’ ने वैश्विक स्तर पर ब्रांड के रूप में पेश किया है और इसकी प्रसिद्धि इतनी है कि इस पर बनी शॉर्ट फिल्म ऑस्कर स्टूडेंट अकादमी अवार्ड के सेमीफाइनल तक पहुँची।
मर्चा चूड़ा और अहुना मटन की यह अनूठी जुगलबंदी न केवल स्थानीय स्वाद को बढ़ावा दे रही है, बल्कि चंपारण की कृषि और पाक विरासत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत कर रही है। मोतिहारी, रक्सौल और आसपास के इलाकों में यह व्यंजन अब सैलानियों और भोजन प्रेमियों का प्रमुख आकर्षण बन चुका है।
कुल मिलाकर, चंपारण अब सिर्फ महात्मा गांधी के सत्याग्रह के लिए ही नहीं बल्कि स्वाद और वैश्विक पाक कला के लिए भी जाना जाता है। मर्चा चूड़ा की मिठास और अहुना मटन का चटपटा स्वाद आज चंपारण की नई पहचान बन चुके हैं।