Wednesday, February 11

175 अरब डॉलर के ‘गोल्डन डोम’ के लिए ग्रीनलैंड जरूरी ट्रंप का खुलासा: रूसी मिसाइलों से अमेरिका को बचाने की तैयारी

 

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर अपने आक्रामक रुख के पीछे की असली वजह पहली बार सार्वजनिक रूप से साफ कर दी है। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रस्तावित ‘गोल्डन डोम मिसाइल डिफेंस सिस्टम’ के लिए ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण बेहद जरूरी है। यह गोल्डन डोम परियोजना करीब 175 अरब डॉलर की बताई जा रही है।

 

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा,

“ग्रीनलैंड अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह उस गोल्डन डोम के लिए जरूरी है, जिसे हम बना रहे हैं।”

 

ग्रीनलैंड से कम कुछ भी मंजूर नहीं

 

राष्ट्रपति ट्रंप ने यहां तक कहा कि ग्रीनलैंड से कम कुछ भी उन्हें मंजूर नहीं है। उनका दावा है कि अगर ग्रीनलैंड पर अमेरिका का नियंत्रण होता है तो नाटो पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और प्रभावी बन जाएगा। उन्होंने यह संकेत भी दिया कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका सैन्य विकल्प से पीछे नहीं हटेगा।

 

इस बयान के बाद यह सवाल और गहरा गया है कि क्या ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने की ट्रंप की जिद सीधे तौर पर गोल्डन डोम मिसाइल डिफेंस सिस्टम से जुड़ी है।

 

रूस-चीन का डर या रणनीतिक दबाव?

 

ट्रंप पहले भी कई बार कह चुके हैं कि ग्रीनलैंड के आसपास रूसी और चीनी जहाजों की मौजूदगी बढ़ रही है। हालांकि, नॉर्डिक देशों के वरिष्ठ राजनयिकों और नाटो से जुड़े विशेषज्ञों ने इन दावों को खारिज किया है।

फाइनेंशियल टाइम्स से बातचीत में नॉर्डिक राजनयिकों ने कहा कि हाल के वर्षों में ग्रीनलैंड के आसपास रूसी या चीनी जहाजों और पनडुब्बियों की कोई ठोस मौजूदगी नहीं देखी गई है।

 

शीतयुद्ध से जुड़ा है ग्रीनलैंड

 

विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रीनलैंड का रणनीतिक महत्व नया नहीं है। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जब जर्मनी ने डेनमार्क पर कब्जा किया था, तब ग्रीनलैंड को अमेरिकी संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया था।

शीतयुद्ध के दौरान अमेरिका ने यहां थुले एयर बेस बनाया, जो सोवियत मिसाइल हमलों से बचाव में अहम भूमिका निभाता था। आज भी अमेरिका को ग्रीनलैंड में सैन्य मौजूदगी बनाए रखने की अनुमति है।

 

गोल्डन डोम और रूसी मिसाइलें

 

ग्रीनलैंड रूस और अमेरिका के बीच स्थित है। सैन्य विश्लेषकों के मुताबिक, अगर रूस अमेरिका पर बैलिस्टिक मिसाइल हमला करता है, तो उनके उड़ान मार्ग ग्रीनलैंड के ऊपर से गुजर सकते हैं।

ऐसी स्थिति में ग्रीनलैंड मिसाइल इंटरसेप्टर तैनाती और रडार सिस्टम के लिए आदर्श स्थान बन जाता है। यही वजह है कि गोल्डन डोम मिसाइल डिफेंस सिस्टम में ग्रीनलैंड की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है।

 

चीन को रोकने की रणनीति

 

ग्रीनलैंड केवल सैन्य नहीं, बल्कि आर्थिक और रणनीतिक खजाना भी है। यहां रेयर अर्थ एलिमेंट्स, यूरेनियम, लिथियम और कोबाल्ट जैसे खनिजों के विशाल भंडार हैं।

रेयर अर्थ एलिमेंट्स की वैश्विक सप्लाई पर फिलहाल चीन का दबदबा है, जिसे अमेरिका तोड़ना चाहता है। ग्रीनलैंड पर पकड़ बनाकर अमेरिका इस क्षेत्र में चीन की रणनीतिक बढ़त को चुनौती देना चाहता है।

 

साफ संकेत

 

विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का ग्रीनलैंड को लेकर आक्रामक रुख सिर्फ बयानबाजी नहीं है, बल्कि यह अमेरिका की दीर्घकालिक सैन्य, मिसाइल डिफेंस और खनिज रणनीति का हिस्सा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा अमेरिका, डेनमार्क और नाटो के बीच बड़े कूटनीतिक टकराव का कारण बन सकता है।

 

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