
जयपुर: भारतीय सेना की 61वीं कैवलरी रेजिमेंट, जो दुनिया की एकमात्र सक्रिय घुड़सवार रेजिमेंट है, ने 78वें सेना दिवस की परेड में सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। इस रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर मेजर यशदीप अहलावत हैं, जिन्होंने 2024 की गणतंत्र दिवस परेड में भी रेजिमेंट का नेतृत्व किया था।
61वीं कैवलरी रेजिमेंट की स्थापना 1 अगस्त 1953 को राज्य कैवलरी बलों को मिलाकर की गई थी। यह रेजिमेंट न केवल युद्ध कौशल में दक्ष है, बल्कि घुड़सवारी में भी माहिर है। गणतंत्र दिवस और राष्ट्रपति के संयुक्त सत्रों में संसद तक उनकी अगुवाई इसी रेजिमेंट द्वारा की जाती है।
इस रेजिमेंट के जवानों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। राजपूत, कायमखानी और मराठा समुदायों के जवानों को प्राथमिक प्रशिक्षण के बाद 18 महीने तक घोड़ों के साथ दोस्ताना संबंध बनाने और कुशल घुड़सवार बनने का प्रशिक्षण दिया जाता है। दो महीने तक घोड़ों की देखभाल, मालिश और उनके स्वभाव को समझना सिखाया जाता है, उसके बाद घुड़सवारी की ट्रेनिंग शुरू होती है।
61वीं कैवलरी ने अब तक 39 युद्ध सम्मान अर्जित किए हैं और इसके जवानों ने 12 अर्जुन पुरस्कार तथा एक पदमश्री भी जीता है। रेजिमेंट का आदर्श वाक्य है “अश्व शक्ति यशोबल”, जो घोड़े की शक्ति और साहस को सर्वोच्च मानता है। पोलो जैसे खेलों में भी यह रेजिमेंट अपना पराक्रम साबित करती रही है।
मेजर यशदीप अहलावत के नेतृत्व में 61वीं कैवलरी न केवल भारत की सैन्य परंपरा का प्रतीक है, बल्कि शौर्य, अनुशासन और घुड़सवारी की अनोखी विरासत को भी संजोए हुए है।