
लीड पैराग्राफ (हिनेली शैली):
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में कड़ाके की ठंड ने बेघर लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दिल्ली सरकार की ओर से दावा किया गया है कि राजधानी में 322 नाइट शेल्टर हैं, जिनमें कुल 19,724 बिस्तर उपलब्ध हैं। लेकिन जब जमीनी हालात का जायजा लिया गया, तो सामने आई चौंकाने वाली हकीकत — कई शेल्टरों में बिस्तरों की संख्या दावों से कोसों दूर है। मोती खान के कमर्शियल बिल्डिंग नाइट शेल्टर में 540 बिस्तरों की जगह सिर्फ 15 बिस्तर ही थे।
मुख्य बिंदु:
चाबी गंज वार्ड-I कम्युनिटी हॉल में 100 की क्षमता बताई गई थी, लेकिन सिर्फ 38 बिस्तर ही उपलब्ध थे।
यमुना बाजार और मजनू का टीला जैसे शेल्टरों में भी बिस्तरों की संख्या क्षमता से बहुत कम रही।
केवल टेंट वाले शेल्टरों में ही क्षमता के अनुसार बिस्तर मौजूद थे।
पिछले कई सालों से सर्दियों में सरकार द्वारा बताए गए 19,000-20,000 बिस्तरों और जमीन पर उपलब्ध बिस्तरों में भारी अंतर रहा है।
अधिकारियों की प्रतिक्रिया:
DUSIB के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हम जांच करेंगे कि कहीं कोई गड़बड़ी तो नहीं है। बिस्तर वाले और बिस्तर रहित क्षमता की अवधारणा अलग होती है। जब बिस्तर लगाए जाते हैं, तो इस्तेमाल करने लायक जगह कम हो जाती है, जबकि बिस्तर रहित जगहों पर अधिक लोग आ सकते हैं।”