Wednesday, May 27

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नीतीश यात्रा: भयंकर ठंड में खुले मैदान में CM का टेंट, सादा भोजन-सादा जीवन, सुबह 7 बजे घूमे गांव

 

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पटना (अशोक कुमार शर्मा) – बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जनवरी 2009 में बगहा से अपनी विकास यात्रा की शुरुआत की थी। महात्मा गांधी द्वारा 1917 में सविनय अवज्ञा आंदोलन की पहली प्रयोगशाला के रूप में प्रसिद्ध बगहा से इस यात्रा को शुरू करते हुए नीतीश कुमार ने गांवों में डेरा डालकर जमीन पर योजनाओं की हकीकत समझने का निर्णय लिया।

 

यात्रा के दौरान नीतीश कुमार के रहने के लिए खुले मैदान में साधारण टेंट हाउस लगाए गए। भयंकर ठंड के बावजूद उन्होंने सादगीपूर्ण जीवन और सादा भोजन अपनाया। टेंट में एक पलंग, एक गद्दा, दो कुर्सी, दो छोटी मेज और एक अलमारी का इंतजाम था। उनके खान-पान में शाकाहारी भोजन – चावल, दाल, रोटी और हरी सब्जी – शामिल था।

 

ठंड के मौसम में अधिकारी इस जीवनशैली से परेशान रहे, लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सादगी और अनुशासन को अपने आदर्श के रूप में अपनाया। अलाव जलाकर रात बिताई गई, और सुबह 7 बजे मुख्यमंत्री तैयार होकर गांव भ्रमण पर निकलते। अधिकारी देर से उठने की आदत होने के बावजूद नीतीश के अनुशासन को देखकर समय पर जागते।

 

एक दिन बगहा के कटैया शिविर में नीतीश कुमार एक सामान्य कार्यकर्ता के घर गए और चाय पी। इस दौरान उन्होंने गांव वालों से बातचीत करते हुए उनकी समस्याओं और योजनाओं की जानकारी ली। मुख्यमंत्री का यह व्यवहार ग्रामीणों को बहुत भाया, जबकि अधिकारियों को कठिन जीवनशैली के कारण चुनौतीपूर्ण लगी।

 

नीतीश कुमार की इस यात्रा ने यह संदेश दिया कि सादा जीवन और जमीनी समझ के साथ ही विकास की योजनाओं का सही क्रियान्वयन संभव है।

 

 

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