Wednesday, January 14

पोंगल से मिलती है प्रकृति संरक्षण की प्रेरणा पीएम मोदी बोले— धरती का सम्मान ही उज्ज्वल भविष्य की नींव

नई दिल्ली।
पोंगल पर्व के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को प्रकृति के प्रति कर्तव्य और जिम्मेदारी का संदेश दिया। दिल्ली में केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के आवास पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पोंगल हमें यह सिखाता है कि प्रकृति के प्रति आभार केवल शब्दों तक सीमित न रहे, बल्कि वह हमारी जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा बने।

This slideshow requires JavaScript.

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब धरती हमें अन्न, जल और जीवन देती है, तो उसे सहेज कर रखना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। मिट्टी की सेहत बनाए रखना, जल संरक्षण करना और प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग आने वाली पीढ़ियों के लिए अत्यंत आवश्यक है। पोंगल जैसे पर्व हमें प्रकृति और किसान के योगदान को सम्मान देने की प्रेरणा देते हैं।

पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सरकारी अभियान

पीएम मोदी ने बताया कि सरकार के मिशन LiFE, वन ट्री फॉर मदर और अमृत सरोवर जैसे अभियान इसी भावना को सशक्त करते हैं। उन्होंने कहा कि देश में खेती को अधिक टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि भविष्य में टिकाऊ कृषि पद्धतियाँ, जल प्रबंधन, प्राकृतिक खेती, एग्री-टेक और वैल्यू एडिशन देश की कृषि व्यवस्था को नई ऊँचाइयों तक ले जाएँगे। उन्होंने युवाओं की सराहना करते हुए कहा कि युवा इन क्षेत्रों में नवाचार और नए विचारों के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

तमिल संस्कृति से जुड़ाव का अनुभव

प्रधानमंत्री ने तमिल संस्कृति से अपने भावनात्मक जुड़ाव का उल्लेख करते हुए कहा कि बीते वर्ष उन्हें तमिलनाडु और तमिल परंपराओं से जुड़े कई ऐतिहासिक अवसरों में भाग लेने का सौभाग्य मिला। उन्होंने गंगईकोंडा चोलपुरम के हजार साल पुराने मंदिर में पूजा-अर्चना और काशी तमिल संगमम के अनुभव को याद करते हुए कहा कि इन पलों में उन्हें सांस्कृतिक एकता की अद्भुत ऊर्जा का अनुभव हुआ।

एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना

पीएम मोदी ने कहा कि रामेश्वरम में पंबन ब्रिज के उद्घाटन के दौरान उन्होंने तमिल इतिहास और संस्कृति की महानता को एक बार फिर महसूस किया। उन्होंने कहा कि तमिल संस्कृति केवल दक्षिण भारत की नहीं, बल्कि पूरे भारत और मानवता की साझा विरासत है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना पोंगल जैसे पर्वों से और मजबूत होती है, जो देश की विविधताओं को जोड़कर एकता का संदेश देते हैं।

प्रधानमंत्री के संदेश ने यह स्पष्ट कर दिया कि पोंगल केवल एक फसल उत्सव नहीं, बल्कि प्रकृति, किसान और सांस्कृतिक एकता का जीवंत प्रतीक है।

 

Leave a Reply