
हर माता-पिता अपने बच्चे का भला चाहते हैं और इसके लिए पूरी कोशिश भी करते हैं। लेकिन कई बार अनजाने में किए गए व्यवहार या बातें बच्चों के आत्मविश्वास पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं। ऐसा ही हाल ही में सामने आया, जब 5 साल के बच्चे की मां पीडियाट्रिशियन डॉ. माधवी भारद्वाज के पास आईं।
बच्चे की समस्या:
मां ने बताया कि उनका बच्चा बिल्कुल पढ़ाई नहीं करता और उन्हें लगता है कि बेटे का दिमाग बिल्कुल काम नहीं कर रहा। एग्जाम आने वाला था, जिससे मां काफी टेंशन में थीं। बच्चा मां की बात सुनते समय कोने में खड़ा था और नजरें झुकी हुई थीं। यह स्पष्ट संकेत था कि बच्चा शर्म और डर के कारण खुद को दबा रहा था।
एक्सपर्ट की सलाह:
डॉ. भारद्वाज ने कहा कि माता-पिता को बच्चों के सामने उनकी खामियों या कमियों का जिक्र कभी नहीं करना चाहिए। पड़ोसियों, रिश्तेदारों या दोस्तों के सामने बच्चों की बुराई करना बच्चे की आत्म-सम्मान और आत्मविश्वास के लिए हानिकारक है। बच्चों के लिए माता-पिता पूरी दुनिया होते हैं। अगर माता-पिता ही उनके बारे में नकारात्मक बातें करते हैं, तो बच्चा खुद पर शक करने लगता है और आत्मविश्वास खो देता है।
कैसे करें सही तरीका:
डॉ. भारद्वाज बताती हैं कि यदि माता-पिता को लगता है कि किसी की मदद से समस्या हल हो सकती है, तो उनसे अकेले में बात करें और बच्चे के सामने इस पर चर्चा न करें। बच्चे के प्रति हमेशा सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
बच्चे पर असर:
यदि कोई करीबी व्यक्ति, जैसे माता-पिता, बच्चे के सामने उसकी कमियों का जिक्र करें, तो शब्द पूरे दिन उसके दिमाग में गूंजते रहते हैं। इससे बच्चा खुद पर शक करने लगता है और मानसिक दबाव महसूस करता है।
निष्कर्ष:
बच्चों के आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य के लिए पेरेंट्स को हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि किसी भी तरह की आलोचना या नकारात्मक टिप्पणी बच्चों के सामने न करें। सकारात्मक माहौल और सही मार्गदर्शन बच्चों की परवरिश का सबसे प्रभावी तरीका है।
डिस्क्लेमर: यह लेख इंस्टाग्राम रील पर आधारित सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें। एनबीटी इसकी पूर्ण सटीकता और प्रभाव की जिम्मेदारी नहीं लेता।