
वॉशिंगटन/नई दिल्ली।
अमेरिका में उच्च शिक्षा के लिए जाने वाले भारतीय छात्रों के लिए यह खबर बेहद अहम है। महंगी पढ़ाई और रहने के खर्च के बावजूद डिग्री के बाद नौकरी न मिलना अब एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। फेडरल रिजर्व बैंक ऑफ न्यूयॉर्क द्वारा जारी ताजा आंकड़े इस ओर साफ इशारा करते हैं कि आज के समय में डिग्री की असली वैल्यू इस बात पर निर्भर करती है कि छात्र ने किस विषय की पढ़ाई की है।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में 15 ऐसे विषय हैं, जिनमें डिग्री लेने के बाद छात्रों को नौकरी पाने में सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। इन कोर्सेज में बेरोजगारी दर अधिक है और बड़ी संख्या में छात्र अपनी योग्यता से कम स्तर की नौकरियां करने को मजबूर हैं।
इतिहास और राजनीति जैसे विषयों में हालात खराब
इतिहास की पढ़ाई करने वाले छात्रों में अंडर-एम्प्लॉयमेंट की दर 51.2 प्रतिशत तक पहुंच गई है। शुरुआती स्तर पर सालाना सैलरी औसतन 40.59 लाख रुपये के आसपास है।
वहीं पॉलिटिकल साइंस में पढ़ाई करने वाले करीब 50.6 प्रतिशत छात्र अपनी डिग्री से मेल न खाने वाली नौकरियां कर रहे हैं।
लिबरल आर्ट्स और अंग्रेजी की डिग्री भी जोखिम भरी
अंग्रेजी, लिबरल आर्ट्स, समाजशास्त्र और इंटरनेशनल अफेयर्स जैसे विषयों में बेरोजगारी दर लगातार बढ़ रही है। इन क्षेत्रों में नौकरी के अवसर सीमित हैं और शुरुआती वेतन भी अपेक्षाकृत कम है, जिससे छात्रों पर एजुकेशन लोन का दबाव बढ़ जाता है।
टेक सेक्टर की छंटनी ने बिगाड़ा हाल
कभी सबसे सुरक्षित माने जाने वाले कंप्यूटर साइंस, कंप्यूटर इंजीनियरिंग और इंफॉर्मेशन सिस्टम एंड मैनेजमेंट जैसे कोर्स भी अब जोखिम में आ गए हैं।
टेक कंपनियों में बड़े पैमाने पर हुई छंटनी के कारण इन क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 6 से 7.5 प्रतिशत तक पहुंच गई है। एंट्री-लेवल जॉब पाना भी पहले की तुलना में कहीं ज्यादा मुश्किल हो गया है।
फाइन आर्ट्स और ग्राफिक डिजाइन पर AI की मार
फाइन आर्ट्स और कमर्शियल आर्ट व ग्राफिक डिजाइन जैसे क्षेत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल ने नौकरियों को प्रभावित किया है। इन फील्ड्स में बेरोजगारी दर 7 प्रतिशत से अधिक है और फुल-टाइम जॉब्स की संख्या लगातार घट रही है।
सबसे खराब स्थिति एंथ्रोपोलॉजी और फिजिक्स की
रिपोर्ट के मुताबिक, एंथ्रोपोलॉजी अमेरिका में नौकरी के लिहाज से सबसे खराब विषय साबित हुआ है। इसमें बेरोजगारी दर 9.4 प्रतिशत तक है और सैलरी भी बेहद कम है।
वहीं फिजिक्स में भी बेरोजगारी दर 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई है, जिससे छात्र इस विषय से दूरी बना रहे हैं।
छात्रों के लिए क्या है सबक?
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका में पढ़ाई का फैसला लेने से पहले छात्रों को डिग्री की जॉब मार्केट वैल्यू, इंडस्ट्री डिमांड और भविष्य की संभावनाओं का गहराई से आकलन करना चाहिए। केवल डिग्री हासिल करना अब नौकरी की गारंटी नहीं रह गया है।