Thursday, June 18

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अमेरिकी नौसेना ने कैरेबियन सागर में एक और तेल टैंकर किया जब्त वॉशिंगटन का सख्त संदेश— अपराधियों के लिए अब कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं

वॉशिंगटन।
अमेरिका ने वेनेजुएला से जुड़े प्रतिबंधित तेल कारोबार के खिलाफ अपनी कार्रवाई और तेज कर दी है। अमेरिकी नौसेना और मरीन कॉर्प्स ने कैरेबियन सागर में एक और तेल टैंकर को जब्त कर लिया है। यह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के तहत की गई ऐसी पांचवीं कार्रवाई है, जिसमें प्रतिबंधों का उल्लंघन करने वाले टैंकरों को निशाना बनाया गया है।

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अमेरिकी दक्षिणी कमान (US Southern Command) के अनुसार, तड़के की गई इस कार्रवाई में ओलिना’ नामक तेल टैंकर को अपने कब्जे में लिया गया। कमान ने स्पष्ट शब्दों में कहा,
अपराधियों के लिए अब कोई भी ठिकाना सुरक्षित नहीं है।”

हेलीकॉप्टर से उतरकर की गई कार्रवाई

अमेरिकी दक्षिणी कमान ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया है, जिसमें अमेरिकी हेलीकॉप्टर को टैंकर पर उतरते और सैन्य कर्मियों को जहाज की तलाशी लेते हुए देखा जा सकता है। अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्रवाई वेनेजुएला के तेल उत्पादों के अवैध वैश्विक वितरण को रोकने के उद्देश्य से की गई है।

ट्रंप प्रशासन की सख्त नीति

अमेरिकी सेना का कहना है कि यह अभियान उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वेनेजुएला से जुड़े प्रतिबंधित जहाजों पर नजर रखी जा रही है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब वेनेजुएला में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के सत्ता से हटने के बाद राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता और बढ़ गई है।

पहले भी हो चुकी है कार्रवाई

इससे पहले अमेरिका रूसी झंडा लगे तेल टैंकर ‘मैरिनेरा’ को भी जब्त कर चुका है। उस टैंकर के चालक दल में तीन भारतीय नागरिक भी शामिल थे। अमेरिकी प्रशासन चालक दल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई पर विचार कर रहा है।

रूस ने जताई आपत्ति

रूसी टैंकर की जब्ती को लेकर रूस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। मॉस्को ने अमेरिका से समुद्री नौवहन की स्वतंत्रता से जुड़े अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करने की मांग की है। रूस ने इस कदम को अमेरिका की नव-उपनिवेशवादी नीति’ करार देते हुए तीखी आलोचना की है।

अंतरराष्ट्रीय समुद्री राजनीति में बढ़ेगा तनाव

विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार हो रही इन जब्तियों से अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और भू-राजनीतिक तनाव और गहराने की आशंका है। अमेरिका जहां इसे प्रतिबंधों के सख्त पालन की कार्रवाई बता रहा है, वहीं कई देश इसे समुद्री स्वतंत्रता पर दबाव के रूप में देख रहे हैं।

 

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